कुक्षी के व्यापारी से वीडियो वायरल करने के नाम पर 93 हजार ठगे
धार। “हम दिल्ली क्राइम ब्रांच से बोल रहे हैं, आपका अश्लील वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने वाला है…”—अज्ञात नंबर से आए एक वीडियो कॉल और इस खौफनाक धमकी ने कुक्षी के एक 26 वर्षीय युवक के होश उड़ा दिए। बदनामी और कानूनी कार्रवाई के डर का फायदा उठाकर साइबर ठगों ने युवक को मानसिक दबाव में लिया और वीडियो डिलीट करने के नाम पर किस्तों में 93,499 रुपये ऐंठ लिए। ठगी का अहसास होने के बाद पीड़ित ने पुलिस की शरण ली, जिसके बाद कुक्षी थाना पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी का अपराध दर्ज किया है।
घटना 6 सितंबर की शाम 6:00 से 7:00 बजे के बीच की है। सिर्वी मोहल्ला (रामचौक, कुक्षी) निवासी रितिक पिता राजेश चोयल (26) जब सुतार मोहल्ला स्थित अपनी दुकान पर मौजूद थे, तभी अज्ञात मोबाइल धारक ने उन्हें वीडियो कॉल किया। कॉलर ने खुद को दिल्ली क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताते हुए दावा किया कि रितिक का एक अश्लील वीडियो व्हाट्सएप पर आया है, जिसे वे यूट्यूब और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अपलोड करने जा रहे हैं। वीडियो हटाने का झांसा देकर आरोपियों ने एक क्यूआर कोड भेजा। घबराए पीड़ित ने पहले 2,500 और 5,000 रुपये ट्रांसफर किए। इसके बाद आरोपियों ने और दबाव बनाया, जिसके चलते पीड़ित ने डरकर 19,000, 19,999, 27,000 और 20,000 रुपये सहित कुल 93,499 रुपये अलग-अलग किस्तों में भेज दिए।
पैसे वसूलने के बाद ठगों ने भरोसा दिलाया कि यह राशि 24 घंटे के भीतर वापस बैंक खाते में आ जाएगी। हालांकि, इसके बाद भी जालसाज लगातार फोन कर और पैसों की मांग करने लगे, जिससे पीड़ित को धोखाधड़ी का पक्का यकीन हुआ। मामले में शून्य एफआईआर (क्र. 668/2026) के आधार पर 10 सितंबर गुरुवार को कुक्षी थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) और 319(2) के तहत असल अपराध कायम किया गया है।
यह मामला साइबर अपराधियों द्वारा अपनाए जा रहे ‘डिजिटल अरेस्ट’ और ‘सेक्सटॉर्शन’ के उस संगठित पैटर्न को उजागर करता है, जिसमें केंद्रीय एजेंसियों या पुलिस के नाम पर आम लोगों में भय पैदा कर त्वरित वसूली की जाती है। पुलिस अब उन मोबाइल नंबरों और क्यूआर कोड से जुड़े बैंक खातों व यूपीआई आईडी की वित्तीय ट्रेल खंगाल रही है, जिसके जरिए आरोपियों तक पहुंचा जा सके। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में किसी भी अज्ञात वीडियो कॉल पर घबराने या पैसे भेजने के बजाय तुरंत नजदीकी थाने या नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (1930) पर सूचना देना ही इस गिरोह से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है।
