धार शहर में करीब 1000 पुलिस जवान और ड्रोन तैनात
धार। धार में मंगलवार सुबह उस समय तनाव और गहमागहमी की स्थिति बन गई, जब पुलिस ने ‘वराह मार्च’ से जुड़े सनातन प्रहरी संगठन के प्रमुख कार्यकर्ताओं को अभिरक्षा में लेना शुरू किया। कार्रवाई के दौरान सनातन प्रहरी के नेता आशीष बसु और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। बसु ने पुलिस से सवाल करते हुए कहा, “पहले आप बताओ कि मुझे कहां ले जा रहे हो, कहीं रास्ते में आप मेरा एनकाउंटर कर दोगे तो।” जिले भर में सोमवार रात से ही शुरू हुई इस प्रशासनिक धरपकड़ के बाद संवेदनशील इलाकों में भारी सुरक्षा बल तैनात कर दिया गया है।
कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कार्रवाई धार जिले में मंगलवार, 15 सितंबर को प्रस्तावित ‘वराह मार्च बाइक रैली’ के मद्देनजर की गई। प्रशासन द्वारा रैली की अनुमति निरस्त किए जाने के बावजूद संभावित जमावड़े को देखते हुए पुलिस ने जिले के विभिन्न क्षेत्रों से सनातन प्रहरी के प्रमुख पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर नजरबंद व थानों में रखना शुरू किया।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विजय डावर के अनुसार, वराह मार्च के कारण कानून व्यवस्था बिगड़ने की पूरी आशंका थी। इसी को ध्यान में रखते हुए अब तक अलग-अलग स्थानों से प्रमुख लोगों को पुलिस अभिरक्षा में लिया गया है।
हिरासत में लिए गए प्रमुख नाम:
- आशीष बसु
- विकास जाट
- लोकेश यादव
- सत्यनारायण रघुवंशी उर्फ टूटू ठाकुर
- संदीप यादव
- बाला उर्फ विक्रम (उम्र 46 वर्ष, निवासी वीर सावरकर मार्ग, धार)
- बाला उर्फ स्वप्निल सितौले (उम्र 35 वर्ष, निवासी आनंद डिसोर मार्ग, धार)
- दीपक उर्फ रोहित साँठे (उम्र 40 वर्ष, निवासी ग्राम जम्मूरखेड़ी, थाना कोतवाली, धार)
- सत्यम पटेल (निवासी डहिवर रोड, धामनोद)
सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए धार शहर में 800 से 1000 पुलिसकर्मियों का भारी बल तैनात किया गया है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने ऐहतियात के तौर पर विजय मंदिर (लॉट मस्जिद) को मंगलवार के लिए बंद कर दिया है और परिसर के बाहर सुरक्षा घेरा बढ़ा दिया गया है। पूरे शहर, विशेषकर प्रस्तावित मार्च मार्ग और संवेदनशील क्षेत्रों पर सीसीटीवी कैमरों, हाई-राइज इमारतों और ड्रोनों के जरिए कड़ी निगरानी रखी जा रही है।

प्रशासन की इस सख्ती और व्यापक धरपकड़ का सीधा असर शहर की सामान्य गतिविधियों और प्रस्तावित कार्यक्रमों पर पड़ा है। संवेदनशील धार्मिक स्थलों और मुख्य चौराहों पर कड़ी नाकेबंदी के चलते आने वाले घंटों में जिले में शांति व्यवस्था बनाए रखना पुलिस-प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती साबित होगा।
