सुरक्षा बलों और बैंकों को मिलेगी छूट, प्रशासन ने जारी किए सख्त आदेश
धार। पंचायतों के उप निर्वाचन को शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और भयमुक्त माहौल में संपन्न कराने के लिए धार जिला प्रशासन ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। चुनाव के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोकने के मकसद से जिले के चिन्हित चुनावी क्षेत्रों में सभी लाइसेंसी आग्नेयास्त्रों (हथियारों) के इस्तेमाल पर अस्थायी रोक लगा दी गई है।
कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी राजीव रंजन मीना ने 18 सितंबर शुक्रवार को आयुध अधिनियम-1959 की धारा-17 (3) (ख) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह आदेश जारी किया। इस आदेश के तहत पंचायतों के उप निर्वाचन वर्ष 2026 (पूर्वार्द्ध) के मद्देनजर संबंधित ग्राम पंचायतों के निर्वाचन सीमा क्षेत्र में समस्त आग्नेय शस्त्र अनुज्ञप्तियों (फार्म नंबर 3 एवं 5) को आदेश दिनांक से लेकर 6 अक्टूबर 2026 तक के लिए तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
इन क्षेत्रों पर लागू रहेगा प्रतिबंध
यह निलंबन आदेश धार जिले की 10 जनपद पंचायतों के चिन्हित ग्रामों में प्रभावी रहेगा:
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जनपद पंचायत धार: खेरोद एवं तोरनोद
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जनपद पंचायत नालछा: सेजवानी, अचाना एवं गुलवा
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जनपद पंचायत तिरला: सलकनपुर
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जनपद पंचायत सरदारपुर: दसाई हाथीवल्ला, सोनगढ, बडोदिया एवं हनुमन्त्या पदमपुरा
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जनपद पंचायत बदनावर: बाबरडा, मुण्डला, छायनखुर्द, कटलावदा, पिपलीपाडा, पलवाडा, हरकाझर एवं धमाना
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जनपद पंचायत मनावर: देवगढ, डोंगरगांव, अजन्दीकोट, देदला, कलवानी, डोंचा एवं जाटपुर
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जनपद पंचायत उमरबन: उखल्दा
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जनपद पंचायत धरमपुरी: पटलावद, फरसपुरा, सरजापुर एवं सनकोटा
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जनपद पंचायत डही: फिफेडा
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जनपद पंचायत निसरपुर: धुलसर एवं कटनेरा
इन्हें रहेगी निलंबन से छूट
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आवश्यक एवं सुरक्षा सेवाओं में तैनात लोगों पर यह पाबंदी लागू नहीं होगी। इनमें माननीय न्यायाधीशगण, कार्यपालिक दण्डाधिकारी, सेना (आर्मी), बीएसएफ, एसएएफ, पुलिस बल, होमगार्ड, बैंकों के सुरक्षा गार्ड तथा महत्वपूर्ण सुरक्षा कार्यों में लगीं प्राइवेट सिक्योरिटी एजेंसियों के हथियार लाइसेंस शामिल हैं।
यदि किसी लाइसेंसधारी को अपनी पदीय स्थिति या व्यक्तिगत सुरक्षा कारणों से इस निलंबन आदेश से छूट की आवश्यकता है, तो वह उचित व पर्याप्त कारणों के साथ पुलिस अधीक्षक, जिला धार के समक्ष अपना आवेदन प्रस्तुत कर सकता है। प्रशासन की इस सख्ती का सीधा असर चुनावी क्षेत्रों में निष्पक्ष मतदान और मतदाताओं में सुरक्षा का भरोसा कायम करने के रूप में देखा जा रहा है।
