स्व-सहायता समूहों ने जनसुनवाई में कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
धार। स्कूली बच्चों की थाली खाली न रहे, इसलिए धार में स्व-सहायता समूह की महिलाएं अपनी जेब से राशन खरीदकर चूल्हा जला रही हैं। पिछले चार महीनों से योजना का बजट अटका हुआ है, लेकिन बच्चों का निवाला न रुके, इस जिम्मेदारी को निभाते-निभाते अब इन महिलाओं का सब्र टूट चुका है।
मंगलवार को जिला पंचायत परिसर में आयोजित जनसुनवाई के दौरान महिला स्व-सहायता समूह महासंघ की सदस्य बड़ी संख्या में एकत्रित हुईं। समूह की महिलाओं ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम जिला कलेक्टर राजीव रंजन मीना को ज्ञापन सौंपकर अपनी पीड़ा बताई। ज्ञापन के जरिए मध्याह्न भोजन, साझा चूल्हा योजना की पिछले चार माह की लंबित राशि जारी करने और रसोइयों के मानदेय का समय पर भुगतान कराने की मांग उठाई गई।
महिलाओं ने प्रशासन के समक्ष स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि एक तरफ महीनों से भुगतान रुका है, वहीं दूसरी तरफ बढ़ती महंगाई के कारण किराना सामग्री के दाम आसमान छू रहे हैं। दुकानदारों ने भी अब उधार राशन देना बंद कर दिया है, जिससे पुरानी निर्धारित दरों पर गुणवत्तापूर्ण भोजन तैयार करना असंभव हो रहा है।
संघ ने शासन से मांग की है कि प्राथमिक विद्यालयों में मध्याह्न भोजन की दर 10 रुपये प्रति छात्र और माध्यमिक विद्यालयों में 15 रुपये प्रति छात्र तय की जाए। इसके साथ ही भोजन बनाने वाली रसोइया महिलाओं की सेवा को स्थायी करने और उनके वर्तमान मानदेय को 4,000 रुपये से बढ़ाकर 10,000 रुपये प्रतिमाह करने की मांग भी प्रमुखता से रखी गई।
कलेक्टर राजीव रंजन मीना ने महिलाओं को मामले की जांच कराकर जल्द समाधान और भुगतान की कार्रवाई का आश्वासन दिया है। यदि लंबित बजट जल्द जारी नहीं होता और दरों में संशोधन नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में जिले के प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में मध्याह्न भोजन व्यवस्था पूरी तरह ठप होने का संकट गहरा सकता है, जिससे सीधे तौर पर हजारों स्कूली बच्चों का पोषण प्रभावित होगा।
