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तिलगारा और रूपाखेड़ा में खिलीं विदेशी फसलें

प्रमुख सचिव और कलेक्टर ने खेतों में देखा उन्नत बागवानी का दम

धार। गेहूं-चने की पारंपरिक खेती से इतर धार जिले के खेतों में अब नवाचार की नई इबारत लिखी जा रही है। कहीं पॉलीहाउस में विदेशी किस्म की ब्लूबेरी और स्ट्रॉबेरी की मिठास घुल रही है, तो कहीं जरबेरा और जिप्सोफिला के फूलों से खेत महक रहे हैं। जिले के अन्नदाता आधुनिक तकनीक और संरक्षित खेती के दम पर न केवल अपनी पैदावार बढ़ा रहे हैं, बल्कि बाजार में अपनी मजबूत पहचान भी बना रहे हैं।

​’मुख्यमंत्री जन विश्वास कार्यक्रम’ के तहत 18 सितंबर को धार जिले के तिलगारा और रूपाखेड़ा गांवों में प्रशासनिक अमला किसानों के नवाचार का गवाह बना। सहकारिता विभाग के प्रमुख सचिव डी.पी. आहूजा और कलेक्टर राजीव रंजन मीना ने बदनावर अनुविभागीय अधिकारी राजस्व श्रीमती प्रियंका मिमरोट एवं अन्य अधिकारियों के साथ खेतों का दौरा किया। इस दौरान अधिकारियों ने आधुनिक कृषि और उद्यानिकी तकनीकों का प्रत्यक्ष निरीक्षण कर फसल विविधीकरण, सिंचाई प्रबंधन और बाजार की संभावनाओं पर किसानों से सीधी चर्चा की।

​ग्राम तिलगारा में कृषक वासुदेव के खेत पर अधिकारियों ने विशेष रूप से ब्लूबेरी की खेती देखी। किसान ने बताया कि पहले वे ‘बिलॉक्सी’ (Biloxi) किस्म उगा रहे थे, लेकिन बेहतर गुणवत्ता और ज्यादा उत्पादन के लिए इस बार बाहर से ‘अजरा ब्लू’ (Azra Blue) किस्म के पौधे लाकर रोपे गए हैं। प्रमुख सचिव ने पौधों की वृद्धि, ड्रिप सिंचाई और स्ट्रॉबेरी के उत्पादन व विपणन का जायजा लिया। इसके बाद रूपाखेड़ा में कृषक जमनालाल परिदा के खेत पर संरक्षित पॉलीहाउस में तैयार हो रहे गुलाब, जरबेरा और जिप्सोफिला के साथ-साथ अमरूद के बगीचे और डेजी की खेती का अवलोकन किया गया।

​धार जिले में अपनाए जा रहे ये नवाचार साबित करते हैं कि यदि सही तकनीक और संरक्षित वातावरण मिले, तो विदेशी और संवेदनशील फसलें भी मालवा की जमीन पर बेहतर परिणाम दे सकती हैं। किसानों का यह रुख न केवल पारंपरिक फसलों पर उनकी निर्भरता कम कर रहा है, बल्कि जिले में आधुनिक कृषि और उच्च-मूल्य वाली बागवानी (High-Value Horticulture) के एक नए आर्थिक मॉडल की नींव भी रख रहा है।

 

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