धार। शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को अनिवार्य किए जाने के फैसले के विरोध में अब शिक्षकों का आक्रोश खुलकर सामने आने लगा है। इसी कड़ी में 11 अप्रैल को धार में सैकड़ों शिक्षकों ने कलेक्टर परिसर में एकजुट होकर जोरदार प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। तपती धूप में रैली निकालकर शिक्षकों ने साफ चेतावनी दी—यदि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और उग्र होगा, यहां तक कि स्कूलों में तालाबंदी भी की जाएगी।
अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर आयोजित इस प्रदर्शन में शिक्षकों ने नायब तहसीलदार महिमा मिश्रा को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। रैली के दौरान हाथों में बैनर-पोस्टर लेकर टीईटी अनिवार्यता का विरोध जताया गया।
संयुक्त मोर्चा के तहत ब्लॉक स्तर पर भी शिक्षकों ने प्रदर्शन में भाग लिया। शिक्षकों ने बताया कि शिक्षा का अधिकार (आरटीई) कानून लागू होने के बाद वर्ष 2010 से टीईटी अनिवार्य किया गया था, लेकिन हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद आरटीई से पहले नियुक्त शिक्षकों को भी दो साल के भीतर टीईटी पास करना अनिवार्य कर दिया गया है।
इस फैसले के तहत परीक्षा में असफल होने वाले शिक्षकों को सेवा से हटाने की बात कही गई है, जिससे शिक्षकों में भारी नाराजगी है।
शिक्षकों ने प्रदेश सरकार से सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने, 2 मार्च को लोक शिक्षण संचालनालय एवं 26 मार्च को जनजातीय कार्य विभाग द्वारा जारी आदेशों को निरस्त करने की मांग की है। साथ ही केंद्र सरकार से अध्यादेश लाकर सेवारत शिक्षकों को टीईटी से राहत देने की मांग भी उठाई गई।
संयुक्त मोर्चा ने घोषणा की है कि 18 अप्रैल को राज्य स्तर पर बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा। यदि इसके बाद भी समाधान नहीं निकला तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
यह जानकारी संयुक्त मोर्चा ब्लॉक अध्यक्ष एवं मीडिया प्रभारी द्वारा दी गई।
