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खराब बीज से किसानों को बड़ा नुकसान: सरकार सख्त, कंपनी पर बैन और केस दर्ज

धार। मध्यप्रदेश के धार और खरगौन जिलों में करेले की फसल को लेकर सामने आई बड़ी लापरवाही ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। निम्न गुणवत्ता के बीज की वजह से फसल खराब होने पर अब सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए संबंधित कंपनी पर प्रतिबंध लगा दिया है और आपराधिक मामला भी दर्ज कराया गया है।

उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने प्रदेशभर में खाद-बीज विक्रेताओं की सख्त जांच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि धार और खरगौन जिलों में किसानों को करेला (सब्जी) का निम्न गुणवत्ता वाला बीज मिलने से फसल को भारी नुकसान हुआ है।

जांच में सामने आया कि तेलंगाना स्थित कंपनी नुन्हेम्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, हैदराबाद द्वारा सप्लाई किए गए “रोबस्टा” किस्म के बीज दोषपूर्ण थे। इसके चलते किसानों की फसल 80-90 दिन बाद भी सही विकसित नहीं हुई और फल पीले होकर बेल से गिरने लगे।

धार जिले के धरमपुरी, उमरबन, मनावर, डही, कुक्षी और निसरपुर तथा खरगौन जिले के महेश्वर, बड़वाह और कसरावद क्षेत्रों में इस बीज का उपयोग किया गया था। कुल मिलाकर धार में 84 हेक्टेयर और खरगौन में 110 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हुआ।

किसानों की शिकायत पर दोनों जिलों के कलेक्टरों द्वारा संयुक्त जांच दल गठित किया गया, जिसमें प्रथम दृष्टया बीज की गुणवत्ता में गंभीर खामियां पाई गईं। इसके बाद आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955, बीज अधिनियम 1966 और बीज नियंत्रण आदेश 1983 के तहत कार्रवाई करते हुए कंपनी के बीज के विक्रय, भंडारण और परिवहन पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया गया है। साथ ही धार जिले में कंपनी के खिलाफ आपराधिक प्रकरण भी दर्ज कर लिया गया है।

मंत्री कुशवाह ने स्पष्ट कहा कि किसानों को उच्च गुणवत्ता के बीज उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है, और इस तरह की लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने सभी जिलों में व्यापक जांच अभियान चलाने और वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा आकस्मिक निरीक्षण के निर्देश भी दिए हैं।

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