22 मई को रचा जाएगा नया इतिहास
धार। यह आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि “हम सकल हिंदू समाज के स्वाभिमान का था।” आखिरकार सात सदियों का लंबा इंतजार खत्म होने जा रहा है। आगामी शुक्रवार, 22 मई 2026 को धार की ऐतिहासिक भोजशाला में हिंदू समाज पूर्ण स्वाभिमान और सम्मान के साथ माँ सरस्वती का पूजन और भव्य महाआरती करेगा। न्यायालय के हालिया फैसले के बाद इसे हिंदू समाज के एक बड़े सांस्कृतिक और धार्मिक विजय के रूप में देखा जा रहा है।
1305 से 2026: संघर्ष की पूरी टाइमलाइन
भोजशाला का इतिहास गौरव और संघर्ष की दास्तान रहा है:
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सन 1305: राजा भोज द्वारा निर्मित माँ सरस्वती मंदिर (भोजशाला) पर अलाउद्दीन खिलजी ने आक्रमण कर इसे अपने नियंत्रण में ले लिया था। तब से ही इसकी मुक्ति के लिए संघर्ष जारी था।
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सन 1997: भोजशाला की मुक्ति और इसके गौरव की पुनर्स्थापना के लिए हिंदू समाज के आंदोलनकारियों ने एक निर्णायक अभियान शुरू किया।
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15 मई 2026 (शुक्रवार): इंदौर उच्च न्यायालय ने इस आंदोलन पर अपनी अंतिम मुहर लगा दी।
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बड़ा बदलाव: भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के रिकॉर्ड से ‘कमाल मौला मस्जिद’ का नाम हट चुका है और अब इसका आधिकारिक नामकरण पूर्ण रूप से ‘भोजशाला’ हो गया है। न्यायालय के निर्णय के बाद अब यहाँ नमाज का अधिकार समाप्त हो चुका है।
एक संयोग जिसने बदल दिया इतिहास
आंदोलन से जुड़े लोगों का मानना है कि यह कोई आम घटना नहीं बल्कि दैवीय इच्छा है।
“यह एक अद्भुत संयोग ही है कि माननीय उच्च न्यायालय की अंतिम मुहर भी शुक्रवार को लगी। इसका सीधा अर्थ है कि स्वयं माँ सरस्वती की भी यही इच्छा थी। माता ने स्वयं घोषित कर दिया कि यह पूर्ण रूप से मंदिर है।”
क्यों खास है इस बार का शुक्रवार
विगत 721 वर्षों में यह पहली बार होगा जब शुक्रवार के दिन हिंदू समाज को भोजशाला में अधिकारपूर्वक प्रवेश और पूजन का अवसर मिलेगा। इससे पहले, प्रति शुक्रवार हिंदुओं का प्रवेश वर्जित था। यहाँ तक कि जब भी शुक्रवार के दिन ‘बसंत पंचमी’ आती थी, तब हिंदू समाज को केवल सीमित अधिकार मिलते थे या विवाद की स्थिति बनती थी। मुगलों और अंग्रेजों के दौर से शुरू हुआ यह सिलसिला आजादी के बाद भी जारी था, जो अब हमेशा के लिए थम गया है।
22 मई का महा-अभियान : ‘धानमंडी’ से शुरू होगा कारवां
यदि कोई अन्य न्यायालयीन अड़चन सामने नहीं आती है, तो 22 मई को धार में एक अभूतपूर्व दृश्य देखने को मिलेगा। वर्षों से हिंदू समाज के दिलों में जो एक कसक और टीस थी, वह अब समाप्त होने जा रही है।
सकल हिंदू समाज द्वारा जारी कार्यक्रम की रूपरेखा:
| समय | कार्यक्रम | स्थान |
| दोपहर 12:00 बजे | समस्त हिंदू समाज का एकत्रिकरण | धानमंडी, धार |
| दोपहर 12:30 बजे | सामूहिक रूप से भोजशाला की ओर प्रस्थान | धानमंडी से भोजशाला मार्ग |
| दोपहर 01:00 बजे | माँ सरस्वती का पूजन एवं भव्य महाआरती | भोजशाला परिसर |
सकल हिंदू समाज की अपील
आयोजकों और सकल हिंदू समाज ने धार के समस्त नागरिकों और श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे इस ऐतिहासिक और गौरवशाली पल के साक्षी बनने के लिए शुक्रवार को दोपहर 12 बजे ठीक समय पर धानमंडी पहुंचें, ताकि सामूहिक रूप से मर्यादा और स्वाभिमान के साथ माँ के दरबार में हाजिरी लगाई जा सके।
