रफ्तार का जुनून या मौत का जाल, आखिर कब तक सस्ती रहेगी मजदूरों की जान?
सुनिल यादव धार में इंदौर-अहमदाबाद हाईवे पर बुधवार रात जो हुआ, वह केवल एक ‘दुर्घटना’ नहीं, बल्कि व्यवस्था की ‘हत्या’ है। 50 मजदूरों को एक छोटे से पिकअप वाहन में भेड़-बकरियों की तरह ठूंस देना और फिर उस वाहन का 100 की रफ्तार से दौड़ना—यह चीख-चीख कर कह रहा है कि हमारे सिस्टम में गरीब…
