डीजे के डेसिबल तय, समय चूके तो झांकी-अखाड़ों का क्रम बदलेगा
धार। अनंत चतुर्दशी, नवरात्रि और दशहरे जैसे बड़े पर्वों के दौरान शहर में कानून-व्यवस्था, सुगम यातायात और शांति बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। उत्सवों के दौरान न तो आवारा मवेशियों की वजह से मार्ग अवरुद्ध होगा और न ही तय सीमा से अधिक तेज आवाज में बजते डीजे की अनुमति दी जाएगी।
धार जिला मुख्यालय पर 23 सितंबर बुधवार को कलेक्टर राजीव रंजन मीना की अध्यक्षता में शांति समिति की महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में पुलिस अधीक्षक सचिन शर्मा, अपर कलेक्टर संजीव केशव पाण्डेय सहित संबंधित विभागों के अधिकारी और शांति समिति के सदस्य उपस्थित रहे। बैठक का मुख्य उद्देश्य आगामी त्योहारों और जुलूसों के दौरान नगर में सुरक्षा, बिजली आपूर्ति, स्वच्छता और ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण की पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित करना था।
कलेक्टर मीना ने व्यवस्थाओं को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए:
- सड़कों और चौराहों की व्यवस्था : मुख्य नगर पालिका अधिकारी को निर्देशित किया गया कि वे आवारा पशुओं पर तत्काल प्रभावी कार्रवाई करें। पशुओं को खुला छोड़ने वाले पशुपालकों पर जुर्माना लगाया जाए। इसके साथ ही नगर में बिना अनुमति लगे अवैध फ्लेक्स और होर्डिंग्स को तुरंत हटाने के निर्देश दिए गए।
- सुरक्षा एवं विद्युत प्रबंधन : विद्युत विभाग को झांकियों और चल समारोहों के निर्धारित मार्गों का पूर्व निरीक्षण करने को कहा गया है, ताकि ढीले या नीचे लटकते तारों की ऊंचाई समय रहते ठीक कर किसी भी दुर्घटना को रोका जा सके।
- डीजे और ध्वनि नियंत्रण : एसडीएम धार को निर्देश दिए गए हैं कि वे डीजे संचालकों के साथ बैठक कर तय डेसिबल सीमा का पालन अनिवार्य कराएं।
- झांकियों और अखाड़ों का क्रम निर्धारण : जुलूस में शामिल होने वाली झांकियों व अखाड़ों को क्रमांक आवंटित किए जाएंगे। यदि कोई झांकी या अखाड़ा अपने तय समय और क्रम पर नहीं पहुंचता, तो उसे स्वतः पीछे कर दिया जाएगा ताकि मुख्य चल समारोह बाधित न हो।
प्रशासन के इन सख्त और सुव्यवस्थित कदमों का सीधा असर आगामी दिनों में शहर की यातायात व्यवस्था और आयोजनों की गरिमा पर दिखाई देगा। समयबद्ध क्रम निर्धारण और कड़े नियमों से न केवल बड़े आयोजनों में होने वाले विवादों और भगदड़ की आशंका समाप्त होगी, बल्कि आम नागरिकों को भी जाम और अत्यधिक ध्वनि प्रदूषण से राहत मिलेगी।
