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पीली टी-शर्ट से खुला ढोल ग्यारस हत्याकांड का राज

15 गांवों के सर्चिंग अभियान से मनावर पुलिस ने पकड़े आरोपी

ढोल ग्यारस जुलूस के दौरान युवक की चाकू मारकर की थी हत्या

धार। धार्मिक उत्सव के उल्लास और ढोल की थाप के बीच हुआ एक मामूली विवाद चंद मिनटों में खूनी संघर्ष में बदल गया। धार जिले के मनावर में ढोल ग्यारस के जुलूस में नाचने को लेकर भड़के आक्रोश ने एक 18 वर्षीय युवक की जान ले ली, जबकि उसका साथी गंभीर रूप से घायल हो गया। बिना किसी नाम या पते वाले इस ‘अंधे कत्ल’ में पुलिस के हाथ सिर्फ एक सुराग था—‘पीली टी-शर्ट’। इसी एक धागे को पकड़कर मनावर पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए महज 24 घंटे के भीतर पूरे मामले का पर्दाफाश कर दिया।

​घटना 22 सितंबर की रात करीब 9 बजे ग्राम देवरा की है। ग्राम अवलदमान निवासी फरियादी प्रभांशु उर्फ बिट्टू अपने साथियों विकास (18), सावन और कान्हा के साथ ढोल ग्यारस का कार्यक्रम देखने गया था। जुलूस में नाचने के दौरान अज्ञात युवकों के साथ उनका विवाद हो गया। विवाद इतना बढ़ा कि हमलावरों ने विकास पर चाकू से जानलेवा वार कर दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई, जबकि बीच-बचाव में सावन भी चाकू लगने से घायल हुआ। 23 सितंबर को दर्ज रिपोर्ट के आधार पर मनावर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) और 118(1) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

​एसपी सचिन शर्मा, एएसपी विजय डावर और एसडीओपी दीपांशु के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी राजेश यादव के नेतृत्व में विशेष टीमों का गठन किया गया। फरियादी द्वारा बताए गए ‘पीली टी-शर्ट पहने संदेही’ की तलाश में पुलिस ने ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए 12 से 15 गांवों में सर्चिंग अभियान चलाया। घटनास्थल के वीडियो फुटेज और मुखबिर तंत्र की मदद से पुलिस ने संदेही विधि-विरुद्ध बालक (नाबालिग) को अभिरक्षा में ले लिया। पूछताछ में उसने अपराध स्वीकार करते हुए अपने साथियों की भूमिका बताई, जिसके बाद दो अन्य आरोपियों को भी हिरासत में ले लिया गया। इस कार्रवाई में निरीक्षक राजेश यादव, उनि. प्रशांत पाल, उनि. शरद बर्डे, उनि. प्रकाश अलावा सहित पुलिस टीम की अहम भूमिका रही।

​विधि-विरुद्ध बालक को किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश कर बाल संप्रेक्षण गृह, झाबुआ भेजा गया है। वहीं थाने के बाल मित्र कक्ष में बाल कल्याण अधिकारी ने उसे अपराध से दूर रहने, शिक्षा जारी रखने और जिम्मेदार नागरिक बनने की समझाइश दी, साथ ही परिजनों को भी बच्चों के उचित मार्गदर्शन और संरक्षण के निर्देश दिए गए।

​त्योहारों और धार्मिक आयोजनों में युवाओं के बीच क्षणिक आवेश और मामूली कहासुनी का इस तरह गंभीर अपराधों में बदलना सामाजिक स्तर पर एक गंभीर चिंता का विषय बन रहा है। पुलिस द्वारा 24 घंटे में की गई इस त्वरित कार्रवाई ने जहाँ क्षेत्र में कानून-व्यवस्था पर जनता का भरोसा मजबूत किया है, वहीं बाल संरक्षण तंत्र की काउंसलिंग यह सुनिश्चित करने का प्रयास है कि भटके हुए किशोर मुख्यधारा में लौट सकें और ऐसे उत्सवों में दोबारा कानून हाथ में लेने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगे।

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