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जानें क्यों 17 मई से शुरू हो रहा है ‘पुरुषोत्तम मास’

खगोलीय चमत्कार : इस साल 12 नहीं, होंगे 13 महीने

धार। क्या आप जानते हैं कि इस साल कैलेंडर में एक अतिरिक्त महीना जुड़ने वाला है? ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, इस वर्ष 12 के बजाय कुल 13 महीने होंगे। यह दुर्लभ संयोग ‘अधिक मास’ के कारण बन रहा है, जिसे शास्त्रों में ‘पुरुषोत्तम मास’ या ‘मलमास’ के नाम से भी जाना जाता है।

प्रसिद्ध ज्योतिष गुरु डॉ. अशोक शास्त्री ने बताया कि इस बार यह अतिरिक्त महीना ज्येष्ठ (जेठ) के रूप में आ रहा है। इसका अर्थ यह है कि इस साल एक नहीं, बल्कि दो ज्येष्ठ महीने होंगे, जिससे ज्येष्ठ माह की कुल अवधि लगभग 58 से 59 दिनों की हो जाएगी।

कब से कब तक है यह संयोग?

  • प्रारंभ: 17 मई

  • समापन: 15 जून

  • खास बात: यह योग लगभग हर 32 महीने (2 साल, 8 महीने और 16 दिन) के अंतराल पर बनता है।

क्यों आता है यह 13वां महीना?

अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता है कि आखिर यह अतिरिक्त महीना क्यों जुड़ता है? डॉ. अशोक शास्त्री ने इसके पीछे का वैज्ञानिक और ज्योतिषीय तर्क साझा किया:

  1. सूर्य और चंद्र वर्ष का अंतर: सूर्य वर्ष लगभग 365 दिन और 6 घंटे का होता है, जबकि चंद्र वर्ष 354 दिनों का।

  2. 11 दिनों की खाई: दोनों वर्षों के बीच हर साल लगभग 11 दिनों का अंतर आ जाता है।

  3. संतुलन का गणित: यदि इस अंतर को ठीक न किया जाए, तो हमारे त्योहार (जैसे होली, दीपावली) धीरे-धीरे मौसम के चक्र से बाहर हो जाएंगे। इसी संतुलन को बनाए रखने के लिए हर तीसरे वर्ष पंचांग में एक अतिरिक्त महीना जोड़ दिया जाता है।

कथा: कैसे मिला इसे ‘पुरुषोत्तम’ नाम?

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, शुरुआत में इस महीने का कोई स्वामी नहीं था। डॉ. शास्त्री बताते हैं कि ज्योतिष में इसे ‘मलमास’ (मैला या अशुद्ध महीना) कहकर त्याग दिया गया था और कोई भी देवता इसका संरक्षण करने को तैयार नहीं था।

“जब यह असहाय मास भगवान विष्णु की शरण में पहुँचा, तो प्रभु ने दयावश इसे अपना नाम प्रदान किया। तब से यह ‘पुरुषोत्तम’ (पुरुषों में जो उत्तम हो) कहलाया और भगवान विष्णु स्वयं इसके अधिपति देव बन गए।”

क्या करें और क्या न करें?

भले ही इस महीने में शुभ कार्यों पर रोक होती है, लेकिन आध्यात्मिक दृष्टि से इसे ‘गोल्डन पीरियड’ माना जाता है।

क्या करें (अत्यंत शुभ) क्या न करें (वर्जित कार्य)
भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की विशेष पूजा विवाह संस्कार (शादी-ब्याह)
श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण मुंडन और उपनयन संस्कार
जप, तप, और दान-पुण्य गृह प्रवेश
दीपदान और अन्न दान नए व्यापार या प्रतिष्ठान की शुरुआत

डॉ. शास्त्री का संदेश : इस महीने में किए गए पुण्य कर्मों का फल अन्य महीनों की तुलना में 10 गुना अधिक मिलता है। इसलिए, आध्यात्मिक उन्नति के लिए यह सर्वोत्तम समय है।

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