उत्तर हिंद महासागर में मौसम का मिजाज: बंगाल की खाड़ी से अरब सागर तक बादलों का डेरा
भोपाल। क्षेत्रीय विशिष्ट मौसम विज्ञान केंद्र ने उत्तर हिंद महासागर (उत्तर बंगाल की खाड़ी और अरब सागर) के लिए अगले 168 घंटों (7 दिनों) का ट्रॉपिकल वेदर आउटलुक जारी किया है। नवीनतम सैटेलाइट तस्वीरों से साफ है कि भारतीय उपमहाद्वीप के दक्षिणी हिस्सों और समुद्री इलाकों में बादलों की भारी आवाजाही शुरू हो गई है।
राहत की बात यह है कि अगले एक हफ्ते तक दोनों ही समुद्री क्षेत्रों में किसी बड़े चक्रवाती तूफान का कोई खतरा नहीं है। मौसम विभाग ने दोनों क्षेत्रों के लिए खतरे की संभावना को (शून्य) बताया है।
कम दबाव का क्षेत्र हुआ कमजोर, लेकिन बादलों का जमावड़ा जारी
मौसम विभाग के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम और उससे सटे पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी पर बना कम दबाव का क्षेत्र अब कमजोर पड़ गया है। हालांकि, इसके प्रभाव से तमिलनाडु के उत्तर-पूर्वी तट और आसपास के इलाकों में 1.5 किलोमीटर की ऊंचाई पर एक चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र बना हुआ है।
- बादलों की स्थिति: बंगाल की खाड़ी के पूर्वी-मध्य और दक्षिणी हिस्सों, अंडमान सागर और मर्तबान की खाड़ी में घने और बिखरे हुए बादल छाए हुए हैं। यहाँ ‘इंटेंस कन्वेंशन’ (गंभीर मौसमी हलचल) देखी जा रही है, जो तेज हवाओं और बारिश का संकेत है।
अरब सागर: केरल-कर्नाटक तट और लक्षद्वीप पर गहराए बादल
अरब सागर की बात करें तो कोमोरिन क्षेत्र (भारत का दक्षिणी सिरा) और उसके पड़ोस में समुद्र तल से 3.1 किलोमीटर ऊपर एक ऊपरी वायु चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय है।
- कहाँ होगी हलचल : सैटेलाइट तस्वीरों में देखा जा सकता है कि दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण-पूर्व अरब सागर, विशेष रूप से कर्नाटक-केरल तट, लक्षद्वीप और मालदीव के इलाकों में घने बादलों की परत बनी हुई है। इन क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की पूरी संभावना है।
राहत की खबर, साइक्लोन का कोई खतरा नहीं
मौसम विभाग ने तटीय इलाकों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर दी है। भले ही समुद्र में बादलों की भारी हलचल और चक्रवाती हवाओं का दौर जारी है, लेकिन अगले 168 घंटों (7 दिनों) तक किसी भी तरह के चक्रवाती तूफान की कोई आशंका नहीं है।
मौसम विज्ञान केंद्र द्वारा जारी 7 दिनों के विशेष बुलेटिन के अनुसार, बंगाल की खाड़ी और अरब सागर दोनों ही क्षेत्रों में अगले 24 घंटे, 48 घंटे, 72 घंटे और यहाँ तक कि पूरे अगले एक हफ्ते (168 घंटे) तक डिप्रेशन बनने की संभावना पूरी तरह से ‘शून्य’ है। वैज्ञानिकों का कहना है कि हर 24 घंटे का यह पूर्वानुमान अगले दिन सुबह 08:30 बजे (IST) तक के लिए मान्य रहेगा। ऐसे में मछुआरों और तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को फिलहाल किसी बड़े तूफान से घबराने की जरूरत नहीं है, हालांकि स्थानीय स्तर पर होने वाली तेज बारिश और मौसमी बदलावों पर नजर रखने की सलाह दी गई है।
