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लंदन से आएगी मां वाग्देवी! इंदौर हाईकोर्ट के फैसले के बाद धार की भोजशाला में ‘दीपावली’

70 साल का ‘कैद’ वाला सत्याग्रह बना महासत्याग्रह

धार (मध्य प्रदेश)। सालों का लंबा इंतजार, लाठियों का दौर, पुलिस का कड़ा पहरा और ‘कैदी’ की तरह सिर्फ मंगलवार को पूजा करने की बेबसी… ये सब अब इतिहास बन चुके हैं। इंदौर हाईकोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद धार की ऐतिहासिक भोजशाला का नजारा पूरी तरह बदल गया है। वर्षों से चला आ रहा प्रति मंगलवार का सत्याग्रह इस बार एक ‘महासत्याग्रह’ में तब्दील हो गया, जहाँ भक्तों का हुजूम उमड़ पड़ा। पूरे परिसर में श्रद्धा, उत्साह और बिल्कुल दीपावली जैसा माहौल था। श्रद्धालुओं ने जमकर आतिशबाजी की, तो वहीं गर्भगृह में मां वाग्देवी का चित्र और नवग्रह पूजन के साथ अखंड ज्योत स्थापित कर दी गई।

“750 साल बाद लौटा गौरव, अब 365 दिन पूजा का अधिकार”

​इंदौर से विशेष रूप से भोजशाला पधारे स्वामी अतुलानंद जी सरस्वती ने इस ऐतिहासिक पल पर गहरा हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि ​“यह 750 वर्षों की लंबी और अनवरत यात्रा की महान जीत है। हमारे नवल किशोर शर्मा ने जो अलख जगाई थी, आज वह ज्योत पूरी तरह प्रज्वलित हो चुकी है। विश्व में मां सरस्वती के बहुत कम मंदिर हैं, जिनमें से यह सबसे प्राचीन और मुख्य था। जब आतताई यहाँ आए, तो उन्होंने इस मंदिर को ध्वस्त किया और यहाँ से मूर्ति चोरी हो गई। लेकिन हमारे सनातनी भाइयों ने मिलकर उस खोए हुए गौरव को पुनः प्राप्त कर लिया है। यह सनातनी धरोहर थी और सदैव रहेगी। इसी तरह ज्ञानवापी, कृष्ण जन्मभूमि और अन्य जो भी स्थान विधर्मियों ने छीने थे, उन्हें भी शीघ्र प्राप्त कर भारत का सांस्कृतिक गौरव बहाल किया जाएगा।”

भोज उत्सव समिति, धार के संरक्षक विश्वास पांडे ने इस जीत को एक बड़े अधिकार के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि ​“हम प्रति मंगलवार को बस इसी संकल्प के साथ यहाँ आते थे कि हमारा यह सत्याग्रह एक दिन जरूर पूर्ण होगा। यह भोजशाला अब तक हमारे लिए एक तरह से ‘कैद’ की तरह थी, क्योंकि हमें सिर्फ मंगलवार को ही यहाँ पूजा करने का सीमित अधिकार मिला हुआ था। हमारी जिद थी कि हमें साल के 365 दिन पूजा का अधिकार मिले। आज हमने उस दिशा में एक बहुत बड़ा कदम पूरा कर लिया है और हमें 365 दिन पूजा-अर्चना का अधिकार प्राप्त हो गया है। सबसे बड़ी खुशी की बात यह है कि दिल्ली से भी अच्छी खबरें मिल रही हैं कि लंदन से मां की मूर्ति को वापस लाने की सारी तैयारियां ज़ोर-शोर से चल रही हैं। जिस दिन मां अपने स्थान पर विराजित होंगी, उसी दिन हमारे इस सत्याग्रह की पूर्णाहुति होगी।”

जीत के बाद भी जारी रहेगा सत्याग्रह, अधिवक्ता मनीष गुप्ता ने बताईं 3 बड़ी मांगें

​वर्ष 2022 से न्यायालय में हिंदू पक्ष रख रहे अधिवक्ता मनीष गुप्ता ने स्पष्ट किया कि धार की धर्मपरायण जनता पिछले 70 वर्षों से यहाँ लगातार सत्याग्रह कर रही है और इसी त्याग का परिणाम है कि कोर्ट ने इसे ‘मंदिर’ घोषित किया। हालांकि, उन्होंने साफ कहा कि सत्याग्रह अभी खत्म नहीं हुआ है क्योंकि हमारी कुछ बेहद महत्वपूर्ण मांगें अभी अधूरी हैं। इसके लिए केंद्र सरकार को एक तीन सूत्रीय मांग का प्रत्यावेदन भेजा गया है:

1. लंदन से मां वाग्देवी की मूर्ति की तत्काल वापसी: माननीय न्यायालय ने केंद्र सरकार को लंदन में रखी मां वाग्देवी की मूल प्रतिमा को वापस बुलाने के निर्देश दिए थे। हिंदू पक्ष ने मांग की है कि यदि केंद्र सरकार ने इस दिशा में कोई ठोस कदम उठाए हैं, तो जनता को उससे अवगत कराया जाए। यदि अभी तक कार्रवाई नहीं हुई है, तो तत्काल प्रभाव से प्रभावी कदम उठाकर मूर्ति वापस लाई जाए।

2. गर्भगृह से इस्लामिक आयतें हटाना: चूंकि इस परिसर को अब पूरी तरह मंदिर घोषित किया जा चुका है, इसलिए इसके गर्भगृह और अन्य हिस्सों में लिखी इस्लामिक आयतों को तुरंत हटाया जाना चाहिए। इन आयतों का अनुवाद करने पर पता चलता है कि ‘अल्लाह के अलावा कोई पूजनीय नहीं है’, जो मां वाग्देवी और सनातनियों की भावनाओं का सीधा अपमान है। इन्हें सम्मानपूर्वक हटाकर किसी अन्य सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया जाए।

3. दबी हुई ऐतिहासिक मूर्तियों को बाहर निकालना: सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर जब ASI ने यहाँ सर्वे किया था, तब परिसर में खुदाई नहीं की जा सकी थी। वर्षों से जनता का अटूट दावा है कि बाईं ओर स्थित छोटे गुंबद के नीचे बजरंगबली की मूर्ति और मुख्य सीढ़ियों के नीचे कई अन्य प्राचीन मूर्तियां दबी हुई हैं। अब चूंकि किसी भी तरह का कानूनी प्रतिबंध नहीं है, इसलिए ASI को तत्काल प्रभाव से खुदाई करके उन मूर्तियों को बाहर निकालना चाहिए ताकि भक्तों की भावनाओं का सम्मान हो सके।

“लाठियों के दौर के बाद मिली मानसिक शांति, यह हमारे लिए नई बसंत पंचमी”

​भोजशाला मुक्ति यज्ञ समिति के संयोजक गोपाल शर्मा ने आंदोलन के दौरान अपने प्राणों की आहुति देने वाले बलिदानियों को याद कर श्रद्धांजलि अर्पित की और उपस्थित श्रद्धालुओं को आंदोलन के पुराने संस्मरण सुनाए।

​सत्याग्रह में शामिल भावुक श्रद्धालुओं ने कहा, “यह हमारे धैर्य की बहुत बड़ी विजय है। हमने यहाँ लाठियों का दौर, पुलिस प्रशासन का सख्त पहरा और तनाव का एक लंबा दौर देखा है। इस फैसले ने पूरे हिंदू समाज को जो मानसिक शांति दी है, उसे शब्दों में बयान करना नामुमकिन है। आप पूरे शहर में घूमकर देखिए, हर चेहरे पर विजय की एक अलग ही रौनक है। यह हमारे लिए दीपावली और एक नई बसंत पंचमी जैसा है। अब हमने संकल्प लिया है कि अगली बसंत पंचमी तक मां की मूल मूर्ति यहाँ स्थापित हो जाएगी और हम मां के सम्मुख इस उत्सव को और भव्य रूप में मनाएंगे।”

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