धार। जिला जेल धार से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां सलाखों के पीछे बंद अपराधियों के बीच खूनी संघर्ष हो गया। जेल की सुरक्षा व्यवस्था को धता बताते हुए एक शातिर कैदी ने दूसरे बंदी पर ब्लेड से ताबड़तोड़ हमला कर उसे लहूलुहान कर दिया। घटना के बाद से जेल परिसर में हड़कंप मचा हुआ है। कोतवाली थाना पुलिस ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए आरोपी कैदी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।
शाम की गिनती के वक्त हुआ ‘ब्लेड अटैक’
घटना 30 मई की शाम करीब 5:00 से 5:10 बजे के बीच की है। जेल के अंदर रोजाना की तरह हलचल थी, तभी अचानक बैरक के पास चीख-पुकार मच गई। जिला जेल धार में बंद आरोपी राजा पिता अशोक ने अचानक किसी बात पर तैश में आकर दूसरे बंदी बादल पिता किशोर पर धारदार ब्लेड से हमला कर दिया। हमला इतना अचानक था कि पीड़ित बादल को संभलने का मौका ही नहीं मिला। ब्लेड के वार से बादल गंभीर रूप से घायल हो गया और लहूलुहान होकर वहीं गिर पड़ा।
जेल प्रहरी की मुस्तैदी से टला बड़ा हादसा
वहां तैनात जेल प्रहरी ने सूझबूझ दिखाते हुए तुरंत बीच-बचाव किया और घायल बंदी बादल को आरोपी के चंगुल से छुड़ाया। अगर सही समय पर जेल प्रहरी दखल नहीं देते, तो कोई अनहोनी हो सकती थी। जेल प्रशासन ने तुरंत घायल मजरूह (पीड़ित) बादल को अस्पताल भिजवाया, जहां डॉक्टरों ने उसकी चोटों का परीक्षण किया।
डॉक्टर की रिपोर्ट: मेडिकल परीक्षण के बाद डॉक्टर ने साफ किया कि बादल पर किसी ‘हार्ड एंड शार्प ऑब्जेक्ट’ (कठोर और धारदार वस्तु यानी ब्लेड) से हमला किया गया है, जिससे उसे गंभीर चोटें आई हैं।
मेडिकल रिपोर्ट आते ही पुलिस ने की FIR दर्ज
घटना के अगले दिन, यानी 31 मई की दोपहर 02:37 बजे थाना कोतवाली धार में आरोपी राजा के खिलाफ आधिकारिक तौर पर मामला दर्ज किया गया।
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देरी से क्यों दर्ज हुई FIR? पुलिस के मुताबिक, घटना के तुरंत बाद घायल बंदी का मेडिकल परीक्षण कराया जा रहा था। डॉक्टर की लिखित मेडिकल रिपोर्ट और जेल प्रशासन के आवेदन प्राप्त होने के बाद ही नियमानुसार कायमी की गई।
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कौन सी धारा लगी? पुलिस ने जेल प्रहरी सुमित शर्मा की लिखित शिकायत पर आरोपी राजा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 118(1) [स्वेच्छा से खतरनाक हथियारों या साधनों से गंभीर चोट पहुंचाना] के तहत अपराध पंजीबद्ध किया है।
सुरक्षा पर उठे बड़े सवाल
इस सनसनीखेज वारदात ने जिला जेल धार की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर कड़े पहरे और चेकिंग के बावजूद जेल के अंदर बंदी के पास ब्लेड जैसी खतरनाक और धारदार वस्तु कहां से पहुंची? क्या यह जेल प्रशासन की लापरवाही है या इसके पीछे कोई गहरी साजिश? पुलिस अब इस बिंदु पर भी जांच कर रही है।

