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कंपनियों की ‘MRP लूट’ के खिलाफ ग्राहक पंचायत ने खोला मोर्चा

सांसद सावित्री ठाकुर को सौंपा ज्ञापन, लागत के आधार पर मूल्य तय करने के लिए सख्त कानून बनाने की मांग

धार। क्या आप भी दुकानों पर मिलने वाले ‘भारी डिस्काउंट’ और ‘बंपर ऑफर’ को देखकर खुश हो जाते हैं? अगर हां, तो थोड़ा संभल जाइए। बाजार का यह डिस्काउंट खेल असल में आपकी जेब काटने का एक बड़ा जरिया बन चुका है। इसी भ्रामक खेल को रोकने और उपभोक्ताओं को न्याय दिलाने के लिए अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत (ABGP) ने अब सीधे केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत धार इकाई द्वारा केंद्रीय राज्य मंत्री एवं धार सांसद सावित्री ठाकुर को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया है। इस ज्ञापन में मांग की गई है कि वर्तमान अधिकतम खुदरा मूल्य प्रणाली में आमूल-चूल सुधार किया जाए और MRP की छपाई पर एक सख्त कानूनी सीमा तय की जाए।

क्यों उठ रही है कानून की मांग

ज्ञापन में इस बात का खुलासा किया गया है कि जिस MRP व्यवस्था को उपभोक्ताओं की भलाई और पारदर्शिता के लिए लागू किया गया था, आज कंपनियां उसी का दुरुपयोग कर रही हैं।

  • दाम बढ़ाओ, फिर डिस्काउंट दिखाओ: कंपनियां प्रॉडक्ट की वास्तविक लागत से कई गुना ज्यादा MRP पैकेट पर छाप देती हैं। इसके बाद ‘50% से 70% तक की भारी छूट’ का विज्ञापन देकर ग्राहकों को फंसाया जाता है।

  • भ्रम में उपभोक्ता: इस खेल के कारण आम उपभोक्ता कभी भी वस्तु के असली मूल्य का सही आकलन नहीं कर पाता और खुद को ठगा सा महसूस करता है।

इन सेक्टर्स में चल रही है ‘लूट’ की खुली छूट

संगठन ने साफ तौर पर उन प्रमुख क्षेत्रों को रेखांकित किया है, जहां लागत और छपे हुए मूल्य के बीच आसमान-जमीन का अंतर देखने को मिल रहा है:

  • दवाइयां और मेडिकल उपकरण : बीमारी के दौर में मजबूरी का फायदा उठाकर जीवन रक्षक दवाओं और उपकरणों पर वास्तविक लागत से कई गुना अधिक MRP छाप दी जाती है।
  • कॉस्मेटिक्स (सौंदर्य उत्पाद) : चमक-दमक और ब्रैंडिंग के नाम पर इन उत्पादों पर मनमाना भ्रामक मूल्य निर्धारण किया जा रहा है।
  • कपड़े और गारमेंट्स : ‘फ्लैट 50%’ या ‘बाय 1 गेट 1’ जैसी सेल के नाम पर सालभर पुराना स्टॉक असली कीमत छुपाकर बेचा जाता है।
  • अन्य उपभोक्ता सामान : दैनिक उपयोग की कई अन्य वस्तुओं में भी पैकेजिंग और मार्केटिंग का हवाला देकर उपभोक्ताओं से मोटी रकम वसूली जा रही है।

ग्राहक पंचायत की प्रमुख मांगें

बाजार में जारी इस मनमानी को रोकने के लिए संगठन ने केंद्र सरकार के सामने निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी हैं:

  1. लागत का खुलासा अनिवार्य हो : हर उत्पाद पर उसकी उत्पादन लागत और विक्रय लागत का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए।

  2. अधिकतम सीमा तय हो : MRP निर्धारण के लिए एक कानूनी सीमा तय की जाए, जिससे कंपनियां मनमाना दाम न लिख सकें।

  3. स्वतंत्र प्राधिकरण का गठन : इस पूरी व्यवस्था की निगरानी और कानूनों का कड़ाई से पालन करवाने के लिए एक स्वतंत्र रेगुलेटरी अथॉरिटी या आयोग का गठन किया जाए।

समय की मांग है MRP में सुधार

अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत के संयोजक महेंद्र सिंह ठाकुर ने इस अवसर पर कहा कि “उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए MRP व्यवस्था में सुधार आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। यदि सरकार इस दिशा में ठोस और कड़े कदम उठाती है, तो देश के लाखों-करोड़ों उपभोक्ताओं को अनुचित मूल्य वसूली और मानसिक शोषण से बड़ी राहत मिलेगी।”

ज्ञापन सौंपने के इस महत्वपूर्ण अवसर पर अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत धार के प्रमुख सदस्य जितेन्द्र सिंह, ओमप्रकाश माधवचार्य, हार्दिक जाट, प्रकाश निगम और अंकित फकीरा सहित कई कार्यकर्ता उपस्थित थे। सांसद सावित्री ठाकुर को सौंपे गए इस ज्ञापन के बाद अब देखना यह होगा कि केंद्र सरकार उपभोक्ताओं को इस ‘प्राइस टैग’ के मायाजाल से मुक्ति दिलाने के लिए क्या कदम उठाती है।

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