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“जैसा रोग वैसी दवा” – धार में विश्व होम्योपैथी दिवस पर गूंजा हैनिमैन का संदेश

धार। नगर के मगजपुरा स्थित होम्योपैथिक औषधालय में शुक्रवार को विश्व होम्योपैथी दिवस उत्साह के साथ मनाया गया। यह अवसर होम्योपैथी के जनक सैमुअल हैनिमैन की जयंती का रहा, जिन्होंने चिकित्सा जगत को एक नई दिशा दी।

हैनिमैन का जीवन और विचार

सैमुअल हैनिमैन का जन्म 10 अप्रैल 1755 को जर्मनी के ड्रेस्डेन में हुआ था। वे मूल रूप से एलोपैथिक चिकित्सक थे, लेकिन उस समय की उपचार पद्धति से असंतुष्ट होकर उन्होंने “सम: समं शमयते” (like cures like) सिद्धांत पर आधारित होम्योपैथी चिकित्सा विकसित की।

सिनकोना छाल पर किए गए उनके प्रयोग ने इस पद्धति की नींव रखी, जो आगे चलकर एक वैकल्पिक चिकित्सा प्रणाली के रूप में स्थापित हुई।

प्रमुख योगदान

उनकी प्रसिद्ध पुस्तक Organon of the Medical Art (1810) में होम्योपैथी के सिद्धांतों को विस्तार से समझाया गया है। उन्होंने “पोटेंशिएशन” तकनीक विकसित की, जिसमें दवाओं को अत्यंत पतला कर उनकी प्रभावशीलता बढ़ाई जाती है।

भारत में लोकप्रियता

आज भारत में होम्योपैथी व्यापक रूप से अपनाई जा रही है और National Institute of Homoeopathy जैसे संस्थान इस पद्धति के प्रचार-प्रसार में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

कार्यक्रम में जिला आयुष अधिकारी डॉ. प्रमिला चौहान, होम्योपैथिक चिकित्सा अधिकारी डॉ. गायत्री मुवेल, आरएमओ डॉ. रमेश मुवेल, डॉ. अतुल तोमर, डॉ. भाग्यश्री नावडे, डॉ. दिनेश कन्नौज, गंगाराम दवा साज धर्मेंद्र सहित अन्य स्टाफ मौजूद रहे। जानकारी डॉ. मुवेल ने दी।

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