भोपाल। दुर्लभ वन्य-जीव सैंडबोआ (दो मुंहा सांप) की तस्करी से जुड़े 10 साल पुराने हाई-प्रोफाइल मामले में भोपाल की अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। माननीय तेईसवें अपर सत्र न्यायालय ने मामले के फरार आरोपी प्रतीक सिंह बोहरा को दोषी करार देते हुए 3 साल के सश्रम कारावास और 2 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
2016 में मीनाल एन्क्लेव के पास हुई थी गिरफ्तारी
यह पूरा मामला 7 जनवरी 2016 का है। मध्यप्रदेश की स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स और एसटीएफ पुलिस ने एक संयुक्त और खुफिया कार्रवाई करते हुए गुलमोहर क्षेत्र के मीनाल एन्क्लेव के पास एक संदिग्ध वाहन को रोका था। तलाशी के दौरान वाहन से दुर्लभ सैंडबोआ बरामद किया गया था। मौके से पुलिस ने अमन उर्फ हनी, लोकेश उर्फ मलिक, विजय उर्फ विज्जू, ब्रजेश पटेल और प्रतीक सिंह बोहरा को गिरफ्तार कर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था।
बाकी आरोपियों को पहले ही मिल चुकी है सजा
इस मामले का मुख्य मोड़ यह था कि आरोपी प्रतीक सिंह बोहरा लंबे समय तक पुलिस को चकमा देकर फरार रहा, जिसे एसटीएफ ने बाद में कड़ी मशक्कत के बाद गिरफ्तार किया। इससे पहले, वर्ष 2022 में इसी प्रकरण के अन्य सह-आरोपियों—अमन सक्सेना, लोकेश मेहरा, विजय वर्मा और अमित चौहान को भी अदालत तीन-तीन वर्ष के कारावास की सजा सुना चुकी है।
मोबाइल वीडियो और फॉरेंसिक रिपोर्ट बने मुख्य आधार
प्रकरण की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने बेहद पुख्ता सबूत पेश किए।
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डिजिटल साक्ष्य: आरोपियों के मोबाइल फोन से जब्त किए गए सैंडबोआ के वीडियो।
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वैज्ञानिक साक्ष्य: फॉरेंसिक प्रयोगशाला (FSL) की वैज्ञानिक जांच रिपोर्ट, जिसने वन्यजीव की प्रामाणिकता की पुष्टि की।
दमदार पैरवी: स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स और एसटीएफ के अधिकारियों द्वारा जुटाए गए मजबूत सबूतों और विशेष लोक अभियोजकों की प्रभावी व आक्रामक पैरवी के चलते अदालत ने आरोपी प्रतीक सिंह बोहरा को जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया।
