जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में ब्लैक स्पॉट्स और जागरूकता अभियान पर गहन मंथन
धार। “जीवन की सुरक्षा सर्वोपरि है। हेलमेट और सीट बेल्ट केवल नियम नहीं, बल्कि जीवन रक्षा के सबसे प्रभावी माध्यम हैं।” यह गंभीर संदेश सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे ने जिला सड़क सुरक्षा समिति की महत्वपूर्ण बैठक में दिया। देश में हर तीन मिनट में सड़क हादसे के कारण एक व्यक्ति की जान जाने की चिंताजनक स्थिति को रेखांकित करते हुए उन्होंने यातायात सुरक्षा अभियान को एक जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया।
सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने और जनहानि को रोकने के उद्देश्य से आज जिला सड़क सुरक्षा समिति की एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे ने की। बैठक में कलेक्टर राजीव रंजन मीना, पुलिस अधीक्षक सचिन शर्मा और अपर कलेक्टर संजीव केशव पाण्डेय सहित संबंधित विभागों के अधिकारी, शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधि, सामाजिक संगठन और मीडिया कर्मी उपस्थित रहे। बैठक के दौरान कलेक्टर मीना ने जिले की वर्तमान स्थिति, पिछले पांच वर्षों के दुर्घटना आंकड़ों और जिले में चिन्हित 18 ब्लैक स्पॉट्स (दुर्घटना संभावित क्षेत्र) की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की।
बैठक के मुख्य बिंदु और सुधारात्मक कदम
न्यायामूर्ति सप्रे ने सड़क सुरक्षा से जुड़े सभी पहलुओं की बारीकी से समीक्षा की और चिन्हित ब्लैक स्पॉट्स पर प्रभावी सुधारात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। बैठक में निम्नलिखित प्रमुख विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई:
- ब्लैक स्पॉट्स में सुधार: प्रशासन द्वारा बताया गया कि कई चिन्हित स्थलों पर सुधार कार्य किए जाने के बाद दुर्घटनाओं और जनहानि में उल्लेखनीय कमी आई है। कुछ स्थानों पर तो हादसों की संख्या शून्य तक लाने में सफलता मिली है।
- नियमों का पालन और चालानी कार्रवाई: बैठक में चिंता व्यक्त की गई कि पुलिस द्वारा चालानी कार्रवाई बढ़ाए जाने के बावजूद नागरिकों में हेलमेट और सीट बेल्ट पहनने की आदत अभी भी अपेक्षित स्तर तक विकसित नहीं हो पाई है।
- निर्माण की गुणवत्ता: सड़क निर्माण एजेंसियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे भविष्य में गुणवत्ता मानकों के अनुरूप ही कार्य करें और नियमित रखरखाव पर ध्यान दें, ताकि नए ब्लैक स्पॉट्स बनने की संभावना ही खत्म हो जाए।
- मानवीय दृष्टिकोण: न्यायमूर्ति सप्रे ने जोर देकर कहा कि सड़क पर किसी घायल व्यक्ति की मदद करना मानवता की सबसे बड़ी सेवा और पुण्य का काम है।

प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर की जा रही इस गहन समीक्षा का भविष्य में यह प्रभाव देखने को मिल सकता है कि चिन्हित 18 ब्लैक स्पॉट्स के तकनीकी सुधार से जिले में सड़क हादसों में भारी कमी आएगी। भविष्य की सड़कों को दुर्घटना-मुक्त डिजाइन में ढालने की तैयारी है। इस अभियान की सफलता के लिए अब प्रशासन, पुलिस, शिक्षा संस्थानों, सामाजिक संगठनों और मीडिया की स्थायी भागीदारी के साथ एक संयुक्त जागरूकता आंदोलन शुरू होने जा रहा है, जिससे नागरिकों के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव आने और जनहानि रुकने की उम्मीद है।
