धार | धार जिले के गुजरी की डेहरिया बस्ती में बुधवार को उस वक्त चीख-पुकार मच गई, जब एक आदमखोर प्रवृत्ति के तेंदुए ने बस्ती में घुसकर तांडव मचा दिया। तेंदुए के हमले में वनरक्षक समेत 5 लोग लहूलुहान हो गए। हालांकि, 15 घंटे तक चले चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद आधी रात को ‘शिकारी’ खुद शिकार बन गया और वन विभाग के पिंजरे में कैद हो गया।

पाइप में छिपा था ‘खतरा’, जेसीबी से घेराबंदी
हमले के बाद तेंदुआ भागकर एक पुलिया के नीचे सीमेंट पाइप में जा छिपा। वन विभाग ने सूझबूझ दिखाते हुए जेसीबी की मदद से पाइप का एक सिरा बंद कर दिया, ताकि तेंदुआ दूसरी तरफ न भाग सके। दूसरे सिरे पर दो बड़े पिंजरे लगाए गए।

तेंदुए को लुभाने का ‘मास्टर प्लान’:
- पिंजरा नंबर 1: इसमें मटन रखा गया था।
- पिंजरा नंबर 2: इसमें बकरा और मुर्गा-मुर्गी छोड़े गए थे।
50 वनकर्मी, 2 जिलों की टीम और ‘आधी रात’ का सस्पेंस
पाइप के बाहर धार डीएफओ विजयानंथम टीआर, बड़वाह डीएफओ भानुप्रताप वर्मा और 50 से अधिक वनकर्मियों की फौज तैनात थी। पूरे इलाके में पुलिस बल ने मोर्चा संभाल रखा था। रात करीब 12:00 बजे जैसे ही भूख से व्याकुल तेंदुआ पाइप से बाहर निकला, वह सीधे पिंजरे में जा फंसा।

रेस्क्यू के बाद अब ‘रेडियो कॉलर’ से होगी निगरानी
पिंजरे में कैद होने के बाद तेंदुए को तत्काल धामनोद फॉरेस्ट ऑफिस ले जाया गया।
- मेडिकल रिपोर्ट: गुरुवार सुबह 6:30 बजे हुए स्वास्थ्य परीक्षण में तेंदुआ पूरी तरह स्वस्थ पाया गया।
- अगला पड़ाव: विभाग अब तेंदुए को रेडियो कॉलर पहनाकर ओंकारेश्वर के घने जंगलों में छोड़ने की तैयारी कर रहा है।
“कल सुबह सूचना मिली थी कि तेंदुए ने ग्रामीणों और हमारे स्टाफ को घायल किया है। हमने उसे पाइप में घेरा और रात 12 बजे वह पिंजरे में आ गया। तेंदुआ स्वस्थ है, उसे रेडियो कॉलरिंग के बाद ओंकारेश्वर में छोड़ा जाएगा।”
— विजयानंथम टीआर, डीएफओ, धार
फ्लैशबैक : पहली बार बस्ती में घुसकर किया हमलाइलाके के लोगों का कहना है कि तेंदुए की हलचल पहले भी देखी गई थी, लेकिन बस्ती में घुसकर इस तरह हमला करने की यह पहली घटना है। घायल वनरक्षक दद्दू सिंह राठौड़ और अन्य ग्रामीणों का इलाज धार के जिला अस्पताल में चल रहा है। फिलहाल, तेंदुए के पकड़े जाने के बाद गुजरी के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है।
