धार | देशभर में संतों और गौ-भक्तों द्वारा चलाए जा रहे ‘गो सम्मान आह्वान अभियान’ का असर आज धार की सड़कों पर साफ दिखाई दिया। सोमवार को कलेक्ट्रेट की दहलीज तब जयकारों से गूंज उठी जब हजारों की संख्या में मातृशक्ति और गौ-भक्त, संतों के सानिध्य में प्रार्थना पत्र सौंपने पहुंचे।
खास बात यह रही कि आस्था के सम्मान में भक्तों ने प्रार्थना पत्रों को अपने हाथों में नहीं, बल्कि सिर पर रखकर रैली निकाली। यह रैली कलेक्ट्रेट गेट से शुरू होकर तहसील कार्यालय तक पहुंची, जहां तहसीलदार को राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया।
प्रमुख माँगें: जो इस आंदोलन की नींव हैं
समिति ने स्पष्ट शब्दों में शासन और प्रशासन के सामने तीन मुख्य माँगें रखी हैं:
- राष्ट्रमाता का दर्जा: गौ माता को आधिकारिक रूप से ‘राष्ट्रमाता’ घोषित किया जाए।
- पूर्ण प्रतिबंध: संपूर्ण देश में गौ-हत्या पर तत्काल और पूर्ण प्रतिबंध लगे।
- कठोर कानून: गौ-वंश के खिलाफ होने वाले अपराधों के लिए संसद में सख्त कानून बनाया जाए।
संतों का सानिध्य और मातृशक्ति का संकल्प
अभियान की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि धार की इस रैली में संतों की बड़ी टोली मौजूद थी। संत गुणानंद जी महाराज, प्रकाश पुरी जी, और साध्वी रामदास जी समेत कई वरिष्ठ संतों की उपस्थिति ने इस आयोजन को आध्यात्मिक स्वरूप दे दिया।
“यह केवल एक हस्ताक्षर अभियान नहीं, बल्कि गौ-वंश की गरिमा को पुनर्जीवित करने का एक संकल्प है।”
— नरेश राजपुरोहित, अध्यक्ष, लक्ष्मी गौशाला समिति
आयोजन के खास पल
- ऐतिहासिक आंकड़ा: धार से कुल 12,000 हस्ताक्षर युक्त प्रार्थना पत्र भेजे गए हैं।
- अनुशासित रैली: कलेक्ट्रेट से तहसील कार्यालय तक गौ-भक्तों ने अनुशासित रहते हुए नारेबाजी की और अपना विरोध व समर्थन दर्ज कराया।
- समन्वय: प्रार्थना पत्र का वाचन लक्ष्मी गौशाला समिति के अध्यक्ष नरेश राजपुरोहित ने किया, जबकि आभार सचिव राजेश हरोड़ ने व्यक्त किया।
ये रहे उपस्थित
इस बड़े अभियान में समिति के संरक्षक नरेश गंगवाल, उपाध्यक्ष देवचंद बोडिया, भीम सिंह परमार, स्वयं प्रकाश सोनी, और प्रताप बढ़तिया (मीडिया प्रभारी) सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी मौजूद रहे। मातृशक्ति की ओर से ममता जोशी, अनीता बोसी, और डाली यादव सहित दर्जनों महिलाओं ने इस पुनीत कार्य में अपनी सहभागिता सुनिश्चित की।
धार की जनता ने आज यह स्पष्ट कर दिया है कि गौ-संरक्षण अब केवल एक मुद्दा नहीं, बल्कि एक जन-आंदोलन बन चुका है।
