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मजदूर दिवस पर ‘मजदूर’ ही बने मुख्य अतिथि

सांसद सावित्री ठाकुर ने आदिवासी श्रमिकों से कटवाया रेलवे ओवरब्रिज का फीता

धार | अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस पर धार में सियासत नहीं, ‘श्रम’ का सम्मान नजर आया। धार-महू सांसद और केंद्रीय राज्यमंत्री सावित्री ठाकुर ने राजनीति की पुरानी परिपाटी को तोड़ते हुए एक नई मिसाल पेश की। धार को गुणावाद से जोड़ने वाले नवनिर्मित रेलवे ओवरब्रिज (ROB-217) का लोकार्पण किसी नेता ने नहीं, बल्कि पसीना बहाने वाले उन आदिवासी श्रमिक भाई-बहनों ने किया, जिन्होंने इसे दिन-रात मेहनत कर खड़ा किया है।

‘वीआईपी’ कल्चर किनारे: श्रमिकों को खिलाई मिठाई, चरणों में झुकाया सिर

आमतौर पर लोकार्पण कार्यक्रमों में वीआईपी कल्चर हावी रहता है, लेकिन शुक्रवार को नजारा बदला हुआ था। केंद्रीय मंत्री ने खुद आगे बढ़कर निर्माण कार्य में लगे श्रमिकों के हाथों में कैंची थमाई और फीता कटवाकर ट्रैफिक शुरू करवाया।

  • सम्मान की मिसाल: मंत्री ने श्रमिकों को श्रीफल भेंट किए और खुद अपने हाथों से मिठाई खिलाकर उनका मुंह मीठा कराया।

  • भावुक क्षण: सावित्री ठाकुर ने कहा, “ईंट और गारे से राष्ट्र की नींव भरने वाले ये श्रमिक ही विकास के असली शिल्पकार हैं। इनके हाथों लोकार्पण करना ही श्रमिक दिवस की असली सार्थकता है।”

जाम से मुक्ति: अब गुणावाद की राह होगी आसान

ब्रिज की एक शाखा शुरू होने से शहरवासियों को बड़ी राहत मिली है।

  1. ब्रिज क्रमांक 217: यह ओवरब्रिज क्षेत्र के यातायात को सुगम बनाएगा।

  2. आर्थिक कॉरिडोर: इसके शुरू होने से व्यापारिक गतिविधियों और सामाजिक आवागमन को नई गति मिलेगी।

  3. अगला लक्ष्य रेल: मंत्री ने रेलवे अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि शेष कार्य भी डेडलाइन के भीतर पूरे किए जाएं ताकि धार को जल्द रेल की सीटी सुनाई दे।

पीएम मोदी का संकल्प और सीएम मोहन का साथ

अपने संबोधन में सावित्री ठाकुर ने कहा कि यह ब्रिज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत 2047’ के विजन का हिस्सा है। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में हो रही विकास की रफ्तार की भी तारीफ की। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वे धार में रेल सुविधा लाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।

मंच पर मौजूद रहे खास चेहरे: कार्यक्रम में धार विधायक नीना विक्रम वर्मा ने भी शिरकत की। साथ ही रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। जब श्रमिकों ने फीता काटा, तो पूरा इलाका तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

जनसमाचार एमपी नजरिया: नेताओं के हाथों पत्थर लगवाना और फीता कटवाना तो आम है, लेकिन पसीने की खुशबू का ऐसा सम्मान राजनीति में नई और सकारात्मक चर्चा का विषय बना है।

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