नारद जयंती पर विचारगोष्ठी कार्यक्रम आयोजित
धार | आधुनिक डिजिटल क्रांति के इस दौर में सूचनाओं की बाढ़ तो आई है, लेकिन इस तेज़ी के बीच अपनी सांस्कृतिक पहचान और ‘स्व’ को बचाए रखना ही सबसे बड़ी चुनौती है। यह विचार उज्जैन के जिला जनसंपर्क अधिकारी कपिल मिश्रा ने स्थानीय स्तर पर आयोजित एक विशेष विचारगोष्ठी में व्यक्त किए।
रविवार, 3 मई को देवर्षि नारद जयंती के पावन अवसर पर विश्व संवाद केंद्र मालवा एवं नगर के समस्त पत्रकारों के संयुक्त तत्वाधान में इस गरिमामयी कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
सांस्कृतिक मूल्यों से हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम का विधिवत आगाज़ मुख्य अतिथियों द्वारा आदि पत्रकार देवर्षि नारदजी के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। विचारगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य आधुनिक संचार माध्यमों, विशेषकर सोशल मीडिया की भूमिका को भारतीय स्वदेशी चिंतन और सांस्कृतिक मूल्यों के आईने में परखना था।
डिजिटल माध्यम बनें राष्ट्रनिर्माण का साधन
मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए कपिल मिश्रा ने कहा, “यदि हम अपनी परंपराओं और मूल्यों से जुड़े रहें, तो डिजिटल माध्यम राष्ट्रनिर्माण का सबसे सशक्त हथियार बन सकते हैं। आज युवा पीढ़ी को सोशल मीडिया का उपयोग जिम्मेदारी के साथ करना चाहिए।” उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि अक्सर घटनाओं के नकारात्मक पहलुओं को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता है, जो समाज के लिए घातक है।
उन्होंने कुंभ जैसे महान सांस्कृतिक आयोजनों का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों को सतही विषयों में उलझाना चिंतनीय है। मीडिया और सोशल मीडिया पर क्या दिखाना है, यह तय करते समय समाजहित और राष्ट्रहित को सबसे ऊपर रखना होगा।
पत्रकारिता: चुनौतियों के बीच आपसी समन्वय जरूरी
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं रेणु अग्रवाल ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में पत्रकारों का मनोबल बढ़ाया। उन्होंने कहा, “आज के समय में पत्रकारिता एक अत्यंत चुनौतीपूर्ण कार्य है। लेकिन यदि हम आपसी सहयोग और बेहतर समन्वय के साथ कार्य करें, तो पत्रकारिता न केवल सार्थक होगी, बल्कि इसके परिणाम भी समाज के लिए हितकारी सिद्ध होंगे।”
इस अवसर पर नगर के गणमान्य पत्रकार और प्रबुद्धजन उपस्थित रहे, जिन्होंने आधुनिक डिजिटल परिवेश में मानवीय संवेदनाओं और आत्मबोध की महत्ता पर गहन मंथन किया।

