23 मई तक उपार्जन केंद्रों पर बढ़ेगी भीड़, अभी से बढ़ाएं तौल कांटे’
धार। इंदौर संभाग के प्रभारी अपर मुख्य सचिव (ACS) अनुपम राजन ने गुरुवार को धार से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संभाग के सभी कलेक्टर्स और जिला पंचायत CEO की क्लास ली। उपार्जन की डेडलाइन (23 मई) नजदीक आते देख ACS ने स्पष्ट कर दिया कि अगले दो हफ्ते किसानों के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण हैं। उन्होंने अधिकारियों को ‘प्रो-एक्टिव’ मोड में आने की हिदायत देते हुए कहा कि व्यवस्थाओं में कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मोबाइल टीमें करेंगी ऑन-द-स्पॉट समाधान
ACS ने कहा कि अंतिम दिनों में केंद्रों पर किसानों का सैलाब उमड़ेगा। इससे निपटने के लिए उन्होंने ‘स्पेशल फॉर्मूला’ दिया:
- मोबाइल टीम: हर जिले में विशेष मोबाइल टीमें गठित होंगी, जो केंद्रों का औचक निरीक्षण करेंगी और मौके पर ही समस्याओं को सुलझाएंगी।
- तौल कांटों का जाल: भीड़ को देखते हुए कांटों की संख्या बढ़ाने और पर्याप्त लेबर (हम्मालों) की व्यवस्था करने के निर्देश दिए।
- पेमेंट और स्टोरेज: किसानों को समय पर भुगतान हो और खरीदे गए अनाज के भंडारण के लिए जगह की कमी न पड़े, इसकी जिम्मेदारी कलेक्टर्स की होगी।
‘प्यास की समस्या आई तो खैर नहीं’
मई-जून की तपिश को देखते हुए राजन ने पेयजल आपूर्ति पर सख्त रुख अपनाया।
- अगले 2 माह क्रिटिकल: एसीएस ने निर्देश दिए कि अगले 60 दिन पेयजल के लिहाज से बेहद संवेदनशील हैं। किसी भी क्षेत्र से पानी की किल्लत की शिकायत नहीं आनी चाहिए।
- शुद्धता और वसूली: पानी की शुद्धता से समझौता न करें और जल प्रदाय व्यवस्था सुचारू रखने के लिए ‘जलकर’ के कलेक्शन पर जोर दें।
जनरेटर और ठंडे पानी का हो इंतजाम
भीषण गर्मी को देखते हुए केंद्रों पर किसानों के लिए जनरेटर (बिजली कटने की स्थिति में), छायादार बैठक व्यवस्था और ठंडे पानी के पुख्ता इंतजाम रखने को कहा। उन्होंने कहा— “अधिकारी स्वयं फील्ड पर रहें और व्यवस्थाओं की मॉनिटरिंग करें, केवल रिपोर्ट पर भरोसा न करें।”
समीक्षा बैठक के हाईलाइट्स:
- अंतिम तिथि: 23 मई तक पूरा करना है उपार्जन का लक्ष्य।
- उपस्थिति: वीसी में संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े, धार कलेक्टर राजीव रंजन मीना, जिला पंचायत सीईओ अभिषेक चौधरी सहित पूरे संभाग के आला अधिकारी शामिल हुए।
- फोकस: किसान समन्वय, त्वरित भुगतान और निर्बाध जल प्रदाय।
नजरिया: सरकारी मशीनरी के लिए अगले 15 दिन अग्निपरीक्षा जैसे हैं। अगर समय पर तौल कांटे नहीं बढ़े, तो केंद्रों पर हंगामे की स्थिति बन सकती है।
