रबर बोट और लाइफ जैकेट के साथ सीखीं आपदा प्रबंधन की बारीकियां
धार | मानसून के दस्तक देने से पहले जिला प्रशासन और होमगार्ड मुख्यालय अलर्ट मोड पर आ गया है। बारिश के दौरान संभावित बाढ़ और प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए सोमवार से जिले में तीन दिवसीय विशेष प्रशिक्षण शिविर का आगाज हुआ। डिस्ट्रिक्ट कमांडेंट आर.पी. मीना के निर्देशन में जवान अब ‘रिस्पांस टाइम’ (घटना स्थल पर पहुँचने का समय) को कम करने और जिंदगियां बचाने का हुनर सीख रहे हैं।
रबर बोट और ओबीएम चलाने का सघन अभ्यास
शिविर के पहले दिन जवानों को अत्याधुनिक उपकरणों के साथ मैदान में उतारा गया। पीसी अशोक चौधरी ने जवानों को आपदाओं के वर्गीकरण और उनके प्रभाव को कम करने की रणनीति समझाई।
- टेक्निकल ट्रेनिंग: जवानों को रबर बोट और ओ.बी.एम. (आउटबोर्ड मोटर) को चंद मिनटों में जोड़ने, खोलने और उसे पानी में उतारने का व्यावहारिक अभ्यास कराया गया।
- रेस्क्यू ऑपरेशन: डूबते हुए व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए ‘लाइफ बॉय’ और ‘लाइफ जैकेट’ के सटीक उपयोग का प्रदर्शन किया गया।

‘जन-धन की हानि रोकना और क्विक रिस्पांस’
प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य मानसून के दौरान किसी भी आपात स्थिति में जवानों की कुशलता को बढ़ाना है। कमांडेंट आर.पी. मीना के अनुसार, उपकरणों का सही रखरखाव और त्वरित कार्रवाई ही आपदा के समय सबसे बड़ा हथियार होती है। यह प्रशिक्षण अगले दो दिनों तक और चलेगा, जिसमें अलग-अलग रेस्क्यू ड्रिल आयोजित की जाएंगी।
जनसमाचार एमपी इनसाइट: क्यों जरूरी है यह ट्रेनिंग?
धार जिले के कई क्षेत्र नर्मदा के डूब प्रभावित और पहाड़ी नालों के पास बसे हैं। भारी बारिश के दौरान अचानक जलस्तर बढ़ने से रेस्क्यू की जरूरत पड़ती है। ऐसे में होमगार्ड के ये दक्ष जवान ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ के रूप में मोर्चा संभालेंगे।
”हमारा फोकस रिस्पांस टाइम को न्यूनतम करने पर है। जवानों को अत्याधुनिक उपकरणों के संचालन में मास्टर बनाया जा रहा है ताकि मानसून के दौरान जिले में किसी भी तरह की जन-हानि को रोका जा सके।”
– आर.पी. मीना, डिस्ट्रिक्ट कमांडेंट, होमगार्ड धार
