धार। मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक केंद्र धार की ‘भोजशाला’ के भविष्य को लेकर आज एक नया अध्याय लिखा जाने वाला है। 98 दिनों के मैराथन वैज्ञानिक सर्वे और हफ़्तों चली तीखी कानूनी दलीलों के बाद, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ आज अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाने जा रही है। जैसे ही कोर्ट की कार्यवाही शुरू होगी, न केवल मध्य प्रदेश बल्कि पूरे देश की नजरें इस फैसले के साथ धार की गलियों पर टिकी होंगी।
98 दिनों का सर्वे और 12 मई का वो सुरक्षित फैसला
भोजशाला विवाद ने तब तूल पकड़ा जब कोर्ट के आदेश पर यहाँ आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों के जरिए सर्वे किया गया। 6 अप्रैल से 12 मई तक चली नियमित सुनवाई के दौरान हिंदू, मुस्लिम और जैन पक्ष ने अपने-अपने दावे पेश किए। हिंदू पक्ष जहाँ इसे माँ वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर और गौरवशाली इतिहास का प्रतीक बताता है, वहीं मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौलाना की मस्जिद मानता है। इस बीच जैन समाज के दावों ने इस कानूनी लड़ाई को और भी जटिल बना दिया है।

अभेद किले में तब्दील हुआ धार: 12 लेयर का सुरक्षा घेरा
आज शुक्रवार है और जुम्मे की नमाज़ भी अदा होनी है। फैसले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने धार को छावनी में बदल दिया है।
- 1200 जवानों की तैनाती: पूरे शहर में चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात है।
- वज्र वाहन और ड्रोन: दंगारोधी ‘वज्र वाहन’ मुस्तैद हैं और संवेदनशील इलाकों पर तकनीकी नजर रखी जा रही है।
- 12 लेयर सुरक्षा: एसपी सचिन शर्मा के अनुसार, शहर की सुरक्षा को 12 परतों में विभाजित किया गया है, जिसमें हाई-राइज बिल्डिंग्स से लेकर मोबाइल पेट्रोलिंग पार्टियां तक शामिल हैं।
- धारा 163 (BNS): जिले में प्रतिबंधात्मक आदेश लागू हैं ताकि कहीं भी भीड़ जमा न हो सके।
कलेक्टर और एसपी की अपील: ‘न्याय का सम्मान करें’
नवागत कलेक्टर राजीव रंजन मीना और एसपी सचिन शर्मा खुद मैदान में हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट संदेश दिया है कि माननीय उच्च न्यायालय का जो भी निर्णय आएगा, उसका अक्षरशः पालन कराया जाएगा।
”हमारा समन्वय सभी संप्रदायों के साथ है। अफवाह फैलाने वालों और माहौल बिगाड़ने की कोशिश करने वालों के खिलाफ पुलिस की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति रहेगी। जनता शांति और भाईचारा बनाए रखे।”
— सचिन शर्मा, एसपी, धार
क्या बदलेगी 2003 की व्यवस्था?
फिलहाल भोजशाला में मंगलवार को पूजा और शुक्रवार को नमाज़ की व्यवस्था लागू है। आज का फैसला यह तय कर सकता है कि यह व्यवस्था जारी रहेगी या सदियों पुराने इस विवाद का कोई स्थायी कानूनी समाधान निकलेगा।
धार की हवाओं में आज हलचल तेज़ है। कुछ ही घंटों में स्पष्ट हो जाएगा कि भोजशाला का मालिकाना हक और उसकी पहचान अब किस दिशा में मुड़ने वाली है।
