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धार के मंच पर उतरी श्रीलंका की संस्कृति

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कैनेडियन और लोकनृत्यों ने मोहा दर्शकों का मन

धार। मध्यप्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक नगरी धार में इन दिनों सुर, ताल और नृत्य की त्रिवेणी बह रही है। अवसर है भोज शोध संस्थान द्वारा आयोजित 11वें पद्मश्री फड़के संगीत समारोह का। त्रि-दिवसीय समारोह के दूसरे दिन धारवासियों को एक ऐसा अनोखा अनुभव मिला, जो इतिहास में दर्ज हो गया। समारोह में पहली बार श्रीलंका के युवा कलाकारों ने कदम रखा और अपने पारंपरिक लोकनृत्यों तथा कैनेडियन नृत्य से ऐसा समां बांधा कि दर्शक अपनी सीटों से उठने को मजबूर हो गए।

​शिव-पार्वती को समर्पित परिधान और ‘गजराज’ का जादू

​श्रीलंकाई कलाकारों ने जब मंच संभाला, तो उनका पारंपरिक परिवेश देखते ही बनता था। भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित श्वेत (सफेद) और लाल रंग के वस्त्रों तथा गज श्रृंगार से जुड़े विशेष आभूषणों में सजे कलाकारों ने अपनी कला का जादू बिखेरा। भले ही धार के श्रोता श्रीलंका की भाषा और शब्दों से अनभिज्ञ थे, लेकिन कलाकारों के मुख अभिनय, आँखों के नर्तन, कदमों के चक्कर और देह की गति-लय ने भाषा की दीवार को तोड़ दिया। कलाकारों ने अपनी पहली प्रस्तुति ‘गजरा वर्णम’ में एक गजराज (हाथी) के देहराग को जंगल से सीधे मंच पर उतार दिया। वहीं दूसरी प्रस्तुति में ‘गगरी नृत्य’ के माध्यम से जल के प्रभाव को बेहद जीवंत और प्रभावी तरीके से पेश किया। इसके बाद प्रस्तुत किए गए ‘कैनेडियन नृत्य’ में कलाकारों की रफ्तार और बॉडी बैलेंसिंग (शरीर संतुलन) ने हर किसी को दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया।

नन्हें कलाकारों ने जगाया आध्यात्मिक भाव

​श्रीलंकाई कलाकारों के साथ ही भारतीय प्रतिभाओं ने भी देशभक्ति और आध्यात्म का अनूठा मिश्रण पेश किया। नूपुर कला केंद्र के नन्हें बच्चों ने श्लोक आधारित नृत्य से पूरे वातावरण को मंत्रमुग्ध कर दिया। बच्चों ने ‘थाने काई काई बोल सुनावा’ भजन पर भगवान कृष्ण के बाल रूप को मंच पर साकार किया।

प्रस्तुति की मुख्य बातें:

  • ​नूपुर कला केंद्र की लगभग 40 बालिकाओं की टीम ने ‘तू प्यार का सागर है’, ‘जय जय अम्बे माँ’ और ‘तांडव’ की शानदार प्रस्तुतियां दीं।
  • ​मंच पर जब ‘ऑपरेशन सिंदूर’, ‘उरी हमला’ और ‘पुलवामा अटैक’ के सजीव दृश्यों को अभिनीत किया गया, तो दर्शक दीर्घा में मौजूद लोगों की आँखें नम हो गईं और पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
  • ​छोटी बालिकाओं ने छत्रपति शिवाजी महाराज के पुत्र संभाजी महाराज की शूरवीरता और उन पर हुए अत्याचारों की गाथा को मंच पर जीवंत कर दिया।

डॉ. मिश्रा को ‘फड़के कला सम्मान’ और ठाकुर को ‘सेनापति उपाधि’

​समारोह का मुख्य आकर्षण रहा प्रतिष्ठित हस्तियों का सम्मान। श्रीलंका से आईं नृत्य निर्देशिका डॉ. अंजली मिश्रा ने न केवल श्रीलंकाई प्रस्तुतियों के भाव पक्ष को दर्शकों के सामने रखा, बल्कि उन्हें इस वर्ष के ’11वें पद्मश्री फड़के कला सम्मान’ से नवाजा गया। सम्मान स्वरूप उन्हें 21,000 नगद राशि, सम्मान पत्र और मोतीमाला भेंट की गई। इसके साथ ही, इतिहासकार, मुद्रा विशेषज्ञ और इंटेक नई दिल्ली के चेयरमैन अशोक सिंह ठाकुर को उनकी अद्वितीय सेवाओं के लिए ‘सेनापति उपाधि सम्मान’ से विभूषित किया गया। इस सम्मान पत्र का वाचन डॉ. दीपेंद्र शर्मा ने किया।

​गरिमामयी उपस्थिति में हुआ सम्मान

​यह सम्मान विक्रम ज्ञान मंदिर के अध्यक्ष करनसिंह पंवार, प्रख्यात कवि डॉ. संदीप शर्मा, डॉ. राघवेन्द्र तिवारी और नारायण जोशी द्वारा शहर के गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति में प्रदान किया गया। सम्मान पाने वाली हस्तियों ने इस पल को अपने जीवन का सबसे स्मरणीय और यादगार क्षण बताया। कार्यक्रम के अंत में सभी कलाकारों को प्रतीक चिन्ह और प्रमाण पत्र बांटे गए। ​मीडिया प्रभारी रॉकी मक्कड़ ने बताया कि तीन दिवसीय समारोह का यह दूसरा दिन कला और संस्कृति के अंतरराष्ट्रीय मिलन का गवाह बना, जिसे धार हमेशा याद रखेगा।

2 thoughts on “धार के मंच पर उतरी श्रीलंका की संस्कृति

  1. अपने नाम को सार्थक करता जनसमाचार जन आयोजन पद्मश्री फड़के संगीत समारोह को बहुत ही अच्छे ढंग से प्रस्तुत किया है। आभारित धन्यवाद 💐💐

    1. धन्यवाद भाईसाहब
      प्रत्येक समाचारों को प्रमुखता और अच्छे से प्रजन्टेशन के साथ रोचक बनाने का प्रयास करता हूं।

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