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‘भोजशाला तो झांकी है, काशी-मथुरा बाकी है’: धार पहुंचे संतों ने की पूजा, HC के फैसले को बताया बड़ी जीत

हनुमान चालीसा के पाठ से गूंजी भोजशाला, अखिल भारतीय संत समिति ने जताया हाईकोर्ट और प्रशासन का आभार

धार। भोजशाला में मंगलवार को एक बार फिर आस्था और उत्साह का अनूठा संगम देखने को मिला। हिंदू समाज और संतों ने मिलकर मां वाग्देवी (सरस्वती) की विशेष पूजा-अर्चना की और परिसर का अवलोकन किया। अखिल भारतीय संत समिति के संयुक्त महासचिव राधे-राधे बाबा और महामंडलेश्वर नरसिंह दास महाराज के नेतृत्व में मालवा, इंदौर विक्त मंडल और रेवा मंडल के पूज्य संत बड़ी संख्या में भोजशाला पहुंचे। इस दौरान संतों ने मां वाग्देवी का आशीर्वाद लिया और परिसर में हनुमान चालीसा का पाठ भी किया।

‘750 साल के संघर्ष को मिली भव्य विजय’

पत्रकारों से चर्चा करते हुए राधे-राधे बाबा ने हाईकोर्ट के हालिया फैसले पर संत समाज की ओर से गहरा आभार जताया। उन्होंने कहा:

“यह फैसला हिंदुओं की भावना और पूजा के अधिकार का सम्मान है। हमारे हिंदू जागरण मंच, संघ परिवार, विश्व हिंदू परिषद और धार के आम लोगों ने मिलकर जो 750 वर्षों तक कानूनी लड़ाई लड़ी, आज उसे एक दिव्य और भव्य विजय मिली है।”

राधे-राधे बाबा ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का जिक्र करते हुए विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में आने वाले समय में धार में मां वाग्वादिनी का एक भव्य मंदिर बनेगा। उन्होंने जोश भरे अंदाज में कहा, “भोजशाला तो अभी सिर्फ झांकी है, काशी और मथुरा अभी बाकी है।”

प्रशासन की ‘सीक्रेट प्लानिंग’ को संतों ने सराहा

संतों ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए वर्तमान जिला प्रशासन और पुलिस अधीक्षक को धन्यवाद दिया। इसके साथ ही, उन्होंने भोजशाला के एएसआई (ASI) सर्वे के दिनों को याद करते हुए एक दिलचस्प वाकया भी साझा किया।

  • सुबह 6 बजे का वो एक्शन: राधे-राधे बाबा ने बताया कि जब विरोधी पक्ष सर्वे पर स्टे (रोक) लगवाने के लिए कोर्ट का रुख कर रहा था, तब तत्कालीन पुलिस अधीक्षक मनोज सिंह और कलेक्टर ने मिलकर एक खास योजना बनाई थी।

  • स्टे से पहले शुरू हुआ काम: कोर्ट से कोई आदेश आता, उससे पहले ही प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाते हुए सुबह 6 बजे ही सर्वे का काम शुरू करवा दिया था, जिससे सर्वे बिना किसी रुकावट के पूरा हो सका। संतों ने इस सूझबूझ के लिए पूर्व अधिकारियों की पीठ थपथपाई।

समिति के संघर्ष को संतों ने किया नमन

संतों ने भोजशाला मुक्ति आंदोलन से जुड़े स्थानीय नेताओं और समिति के सदस्यों की जमकर तारीफ की। उन्होंने विशेष रूप से गोपाल शर्मा, अशोक जैन और उनकी पूरी टीम के प्रति आभार व्यक्त किया, जो सालों से इस कानूनी और सामाजिक लड़ाई को मजबूती से लड़ रहे हैं। संतों के इस दौरे के बाद स्थानीय हिंदू समाज में भारी उत्साह देखा जा रहा है।

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