ई-गवर्नेंस से जुड़ीं सभी तहसीलें
101 फरियादियों की शिकायतों पर कलेक्टर सख्त, कहा- दफ्तरों के चक्कर न काटे जनता
धार। जिला प्रशासन और आमजन के बीच की दूरी को मिटाते हुए आज मंगलवार को धार जिला मुख्यालय पर तकनीक और संवेदनशीलता का एक अनोखा संगम देखने को मिला। जिला पंचायत सभाकक्ष में आयोजित साप्ताहिक जनसुनवाई में कलेक्टर राजीव रंजन मीना ने न केवल खुद मौजूद रहकर लोगों की फरियाद सुनी, बल्कि ‘ई-गवर्नेंस’ के जरिए पूरे जिले के अधिकारियों को एक ही स्क्रीन पर लाकर ऑन-द-स्पॉट एक्शन का लाइव नजारा पेश किया।
इस हाईटेक और संवेदनशील जनसुनवाई की बड़ी बातें नीचे दी गई हैं:
ई-गवर्नेंस से ‘ऑन-द-स्पॉट’ एक्शन
आमतौर पर जनसुनवाई में आवेदन लेकर फाइलें आगे बढ़ा दी जाती हैं, लेकिन इस बार नजारा बदला हुआ था। कलेक्टर मीना के सामने जैसे ही कोई आवेदक अपनी समस्या लेकर पहुंचता, वे तुरंत ई-गवर्नेंस (वर्चुअल माध्यम) से जुड़े संबंधित अनुविभागीय अधिकारी या विभाग प्रमुख को स्क्रीन पर लेते। अधिकारियों से आमने-सामने सीधे बात की गई और लापरवाही बरतने वालों को दो टूक शब्दों में समय-सीमा के भीतर निराकरण के कड़े निर्देश दिए गए।
101 आवेदन और समस्याओं का अंबार
इस साप्ताहिक जनसुनवाई में कुल 101 आवेदन प्राप्त हुए। जिला मुख्यालय पहुंचे फरियादियों की समस्याओं का दायरा बहुत बड़ा था, जिसमें मुख्य रूप से ये मामले छाए रहे:
- अतिक्रमण और जमीनी विवाद: शासकीय नाले और मंदिर परिसर से अवैध कब्जा हटाना, मकान निर्माण में आ रही बाधा, और पट्टे की जमीन पर जबरन कब्जे की शिकायतें।
- राजस्व एवं रिकॉर्ड: भूमि नामांतरण, खाते-खसरे में नाम सुधार, भूमि का सीमांकन और बंधक शब्द हटवाने की मांग।
- सहानुभूति और सहायता: पति की मृत्यु के बाद अनुकंपा नियुक्ति व पेंशन दिलाना, संबल योजना की राशि और फसल खराबे का मुआवजा।
- बुनियादी और सामाजिक जरूरतें: दिव्यांग आवेदक को ट्राइसिकल दिलवाना, प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ, स्कूल में शिक्षकों की व्यवस्था और मकान के सामने से बिजली की डीपी हटाना।
कलेक्टर का सख्त संदेश:
“सभी आवेदनों का एक निश्चित समय-सीमा के भीतर पूरी गुणवत्ता के साथ निराकरण होना चाहिए। किसी भी गरीब या जरूरतमंद आवेदक को अपनी बुनियादी समस्याओं के लिए बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।”
मौके पर ही दिए वैधानिक समाधान
कलेक्टर के साथ-साथ जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालक अधिकारी अभिषेक चौधरी ने भी कमान संभाली। उन्होंने कई आवेदकों की समस्याओं को बेहद करीब से सुना और मौके पर मौजूद व वर्चुअल जुड़े मैदानी अधिकारियों को कानून सम्मत और त्वरित समाधान निकालने के निर्देश दिए।
क्यों खास रही यह जनसुनवाई
धार जिला प्रशासन की यह पहल यह साबित करती है कि अगर आधुनिक तकनीक को प्रशासनिक इच्छाशक्ति के साथ जोड़ दिया जाए, तो जनता की समस्याओं का समाधान कितना सुलभ और पारदर्शी हो सकता है। कलेक्टर और पूरी प्रशासनिक टीम की इस सक्रियता की आमजन में काफी सराहना हो रही है।
