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वनों की सुरक्षा के लिए ‘सलाई’ के 35,000 पौधों से बनेगी ‘बायो-फेंसिंग’

धार वनमण्डल की अनूठी पहल, देखें क्या है सरकार का खास प्लान

धार। जंगलों की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को लेकर धार वनमण्डल ने एक बेहद अनूठा और बड़ा अभियान छेड़ा है। वनमण्डल अधिकारी के नेतृत्व में वनों के संवर्धन और उन्हें सुरक्षित करने के लिए 01 जून से 07 जून तक एक विशेष सप्ताह मनाया जा रहा है। इस अभियान के तहत धार वन मंडल के अंतर्गत आने वाले सभी प्रमुख परिक्षेत्रों—धार, मांडव, धामनोद, सरदारपुर, कुक्षी, बाग एवं टाण्डा के पुराने और नए वृक्षारोपण क्षेत्रों को सुरक्षित किया जा रहा है। खास बात यह है कि इसके लिए लोहे के तारों की जगह प्रकृति का ही सहारा लिया जा रहा है। वनों के किनारों पर सलाई (Boswellia serrata) की 35,000 कटिंग लगाकर प्राकृतिक ‘बायो-फेंसिंग’ तैयार की जा रही है।

विलुप्त होती ‘सलाई’ को मिलेगा नया जीवन

सलाई का पेड़ पारिस्थितिक और आर्थिक, दोनों ही दृष्टिकोण से बेहद अनमोल है। लेकिन बीते कुछ समय में यह प्रजाति जंगलों से लगभग खत्म होने के कगार पर पहुंच चुकी थी। वन विभाग का यह प्रयास इसे पुनर्जीवित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

  • औषधीय व व्यावसायिक महत्व: यह पेड़ बहुमूल्य राल (शल्लकी/लोबान) का प्रमुख स्रोत है।

  • रोजगार का जरिया: स्थानीय आदिवासी और ग्रामीण समुदायों को इससे लघु वनोपज (NTFP) मिलती है, जिससे उनकी आजीविका चलती है।

  • उद्योगों में मांग: सलाई के जरिए मिलने वाले गोंद और इसकी लकड़ी का उपयोग माचिस उद्योग में बड़े पैमाने पर होता है।

  • कठिन हालातों का साथी: यह प्रजाति शुष्क, बंजर और पथरीले क्षेत्रों में भी आसानी से पैर जमा लेती है।

‘खूंटा गाड़ पद्धति’: कम लागत में 100% सुरक्षा की गारंटी

सलाई के पौधों को उगाना बेहद मुश्किल काम माना जाता है। सामान्य परिस्थितियों में इसके 100 में से केवल 20 पौधे ही जीवित बच पाते हैं। इस कम सर्वाइवल रेट की चुनौती से निपटने के लिए वन विभाग इस बार वैज्ञानिक तकनीक ‘स्टम्प प्लांटिंग पद्धति’ (खूंटा गाड़ पद्धति) का उपयोग कर रहा है।

क्यों खास है यह तकनीक और क्या होंगे फायदे

  • बेहद कम लागत: यह पारंपरिक फेंसिंग के मुकाबले कहीं ज्यादा सस्ती है, जिससे सरकारी बजट की भारी बचत होगी।

  • हाई सर्वाइवल रेट: वैज्ञानिक विधि होने के कारण विपरीत मौसम में भी पौधों के जीवित रहने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।

  • प्राकृतिक सुरक्षा दीवार: कलम से पौधे फूटने के बाद जब ये 4 से 5 फीट ऊंचे हो जाएंगे, तो मवेशियों और अतिक्रमणकारियों से वनों की रक्षा करने के लिए एक मजबूत सुरक्षा दीवार बन जाएंगे।

‘विश्व पर्यावरण दिवस’ पर आम लोग भी रचेंगे इतिहास

वन विभाग इस अभियान को केवल सरकारी फाइलों तक सीमित नहीं रखना चाहता, बल्कि इसे एक जन-आंदोलन बनाने की तैयारी है। 5 जून को ‘विश्व पर्यावरण दिवस’ के मौके पर हर परिक्षेत्र में एक भव्य उत्सव जैसा माहौल रहेगा। इस दिन प्रत्येक परिक्षेत्र में 5,000 सलाई कटिंग लगाने का लक्ष्य रखा गया है। इस ‘सांकेतिक पौधा रोपण कार्यक्रम’ में क्षेत्र के जनप्रतिनिधि, आम नागरिक और स्थानीय वन समितियों के सदस्य कंधे से कंधा मिलाकर हिस्सा लेंगे। अगर आप भी धार या आसपास के क्षेत्रों में हैं, तो इस महाअभियान का हिस्सा बनकर धरती को हरा-भरा बनाने में अपना योगदान दे सकते हैं।

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