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फुलगावड़ी में जुटे 100 से अधिक पशुपालक, ‘गोरस एप’ और ‘साइलेज’ से दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के सीखे गुर

एक दिवसीय कार्यशाला में आधुनिक तकनीकों और विभागीय योजनाओं की मिली लाइव ट्रेनिंग

धार। मध्य प्रदेश के पशुपालन एवं डेयरी विभाग (भोपाल) के निर्देशानुसार, दुग्ध उत्पादकों को आधुनिक और वैज्ञानिक तकनीकों से जोड़ने के लिए एक बेहतरीन पहल की गई है। जिले के दुग्ध संघ शीत केंद्र फुलगावड़ी में एक दिवसीय ‘पशुपालक जागरूकता कार्यशाला’ का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में क्षेत्र के 100 से अधिक उत्साही पशुपालकों और दुग्ध उत्पादकों ने हिस्सा लिया और जाना कि कैसे पारंपरिक डेयरी फार्मिंग को एक मुनाफे वाले बिजनेस में बदला जा सकता है।

मुख्य अतिथि और विशेषज्ञ टीम ने किया शंकाओं का समाधान

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उपसंचालक (पशु चिकित्सा सेवाएं, जिला धार) डॉ. राकेश सिंह सिसोदिया रहे। पशुपालकों की जिज्ञासाओं और समस्याओं का ऑन-द-स्पॉट समाधान करने के लिए विभाग के शीर्ष विशेषज्ञों की टीम मौजूद रही, जिसमें शामिल थे:

  • डॉ. विक्रम पंवार (ब्लॉक वेटरिनरी ऑफिसर, धार)

  • डॉ. जे.वी.बी. राजू (जिला नोडल अधिकारी, क्षीर धारा ग्राम योजना)

  • डॉ. दिलीप गामड़ (ब्लॉक वेटरिनरी ऑफिसर, सरदारपुर)

  • डॉ. मीनाक्षी डावर (पशु चिकित्सा अधिकारी)

दुग्ध संघ की ओर से वर्षा सिंगारे एवं मोहन वास्केल सहित अन्य अधिकारियों ने भी पशुपालकों का मार्गदर्शन किया।

साइलेज निर्माण और संतुलित आहार से गर्मियों में भी नहीं होगी चारे की कमी

इस कार्यशाला का सबसे मुख्य आकर्षण रहा पशुओं के पोषण प्रबंधन पर हुआ विशेष सत्र। विशेषज्ञों ने पशुपालकों को समझाया कि वैज्ञानिक तरीकों से दुग्ध उत्पादन को कैसे बढ़ाया जा सकता है।

क्या रहा खास

  • साइलेज निर्माण: सालभर और खासकर चिलचिलाती गर्मियों में हरे चारे की कमी को दूर करने के लिए ‘साइलेज’ (हरे चारे को संरक्षित करने की वैज्ञानिक विधि) बनाने का लाइव तरीका सिखाया गया।

  • संतुलित आहार: पशुओं की सेहत और बेहतर दूध के लिए खनिज मिश्रण के महत्व को रेखांकित किया गया।

  • सुरक्षा चक्र: पशुओं में रोग नियंत्रण और समय पर टीकाकरण कराने के लिए प्रेरित किया गया।

अब मोबाइल पर होगा चारे का व्यापार

डिजिटल इंडिया के इस दौर में अब पशुपालक भी हाईटेक होने जा रहे हैं। अधिकारियों ने शासन के महत्वाकांक्षी ‘गोरस एप’ के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

इस एप की मदद से पशुपालक:

  1. चारे की उपलब्धता की रीयल-टाइम जानकारी देख सकेंगे।

  2. घर बैठे चारे का क्रय-विक्रय (खरीद और बिक्री) कर सकेंगे।

  3. विपणन (Marketing) संबंधी सुविधाओं का सीधा लाभ उठा सकेंगे।

कार्यशाला में मौजूद सभी पशुपालकों को मौके पर ही मोबाइल में एप डाउनलोड करवाकर उसे चलाने का व्यावहारिक प्रशिक्षण (Live Demo) भी दिया गया।

इस बड़े आयोजन को सफल बनाने में सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी हेमराज कटारा, अशोक मालवीय, सुनीता डामोर एवं ममता भयडिया सहित पूरे विभागीय अमले का महत्वपूर्ण और सराहनीय योगदान रहा।

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