Headlines

‘श्री लीलादेवी हॉस्पिटल’ तत्काल प्रभाव से सील, सस्पेंडेड लाइसेंस पर भी धड़ल्ले से भर्ती कर रहे थे मरीज

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से नहीं ली थी मंजूरी (CTO), नोटिसों को भी हवा में उड़ाया

धार। धार शहर के मांडव रोड स्थित ‘श्री लीलादेवी हॉस्पिटल’ पर जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। नियमों को ताक पर रखकर और बिना वैध कागजात के चल रहे इस अस्पताल का पंजीयन (रजिस्ट्रेशन) और अनुज्ञापन (लाइसेंस) तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी धार के इस कड़े आदेश के बाद अब इस अस्पताल में किसी भी तरह का इलाज या मेडिकल सर्विस देना पूरी तरह ‘अवैध’ होगा। 

न प्रदूषण बोर्ड की परमिशन, न नोटिसों की परवाह

मामला केवल एक नियम टूटने का नहीं है, बल्कि अस्पताल प्रबंधन लगातार स्वास्थ्य विभाग के आदेशों को हवा में उड़ा रहा था। बालाजी नगर, मांडव रोड स्थित श्री लीलादेवी हॉस्पिटल को मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से ‘जल और वायु प्रदूषण निवारण अधिनियम’ के तहत जरूरी ‘Consent to Operate’ (CTO) लेकर जमा करना था। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने एक के बाद एक कई रिमाइंडर और कारण बताओ नोटिस जारी किए। अस्पताल प्रबंधन ने न तो कोई वैध डॉक्यूमेंट जमा किया और न ही सरकारी नोटिसों का कोई जवाब देना मुनासिब समझा। आखिरकार, इंदौर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भी इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए अस्पताल का रजिस्ट्रेशन रद्द करने की सिफारिश कर दी थी।

औचक निरीक्षण में हुआ हैरान करने वाला खुलासा

इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात 21 अप्रैल 2026 को सामने आई। जब डॉ. नरेन्द्र पवैया के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अस्पताल का औचक निरीक्षण किया, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारी भी दंग रह गए। अस्पताल का लाइसेंस पहले से ही सस्पेंड चल रहा था। इसके बावजूद अस्पताल प्रबंधन धड़ल्ले से मरीजों को भर्ती कर उनका इलाज कर रहा था, जो कि मरीजों की जान के साथ सीधे तौर पर खिलवाड़ था। 

दोबारा ताला खोला तो सीधे होगी एफआईआर

सीएमएचओ धार ने अपने आदेश में साफ कर दिया है कि श्री लीलादेवी हॉस्पिटल प्रबंधन द्वारा म.प्र. उपचर्यागृह एवं रूजोपचार संबंधी स्थापनायें अधिनियम 1973 (संशोधित नियम 2021) का लगातार उल्लंघन किया गया है। आदेश जारी होते ही अस्पताल की सभी चिकित्सीय गतिविधियों पर तुरंत रोक लगा दी गई है। स्वास्थ्य विभाग ने साफ अल्टीमेटम दिया है कि अगर इस आदेश के बाद भी चोरी-छिपे अस्पताल का संचालन किया गया, तो नर्सिंग होम एक्ट और अन्य कानूनी धाराओं के तहत प्रबंधन के खिलाफ सीधे एफआईआर दर्ज कराई जाएगी और जेल की हवा खानी पड़ सकती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *