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नेशनल लोक अदालत : 2812 मामलों का हुआ निपटारा, 22.41 करोड़ के अवॉर्ड पारित; टूटे परिवार फिर जुड़े

पक्षकारों को पौधे भेंट कर सुलझाए वर्षों पुराने विवाद

धार। कानूनी दांव-पेंच और तारीखों के लंबे सिलसिले के बीच जब बातचीत की मेज पर गिले-शिकवे दूर हुए, तो कई चेहरों पर राहत लौट आई। अदालत परिसर में शनिवार को सिर्फ मुकदमों की फाइलें ही बंद नहीं हुईं, बल्कि सालों से अलग रह रहे दंपतियों ने एक-दूसरे को माला पहनाकर नए रिश्ते की शुरुआत की और वर्षों पुरानी पड़ोसी रंजिशें भी खत्म हुईं। ‘न कोई जीता, न कोई हारा’ की भावना के साथ पक्षकारों को विवादों से स्थायी मुक्ति मिली और सुलह की निशानी के तौर पर ‘न्याय वृक्ष’ के पौधे सौंपे गए।

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नई दिल्ली) एवं मप्र राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (जबलपुर) के तत्वावधान में 12 सितंबर शनिवार को धार जिला न्यायालय सहित कुक्षी, धरमपुरी, मनावर, सरदारपुर और बदनावर तहसील न्यायालयों में वर्ष की तृतीय नेशनल लोक अदालत आयोजित की गई। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीमती ममता जैन की अध्यक्षता में कुल 44 खंडपीठों के माध्यम से 2812 लंबित एवं प्री-लिटिगेशन मामलों का निपटारा किया गया, जिसके तहत कुल 22.41 करोड़ रुपये के अवार्ड पारित व वसूली की गई।

प्रकरणों के निराकरण का ब्योरा

  • न्यायिक मामले : दाण्डिक एवं सिविल राजीनामा योग्य 1107 लंबित प्रकरणों का निराकरण कर 17.71 करोड़ रुपये के अवार्ड पारित किए गए।

  • प्री-लिटिगेशन : 1383 प्रकरणों में विभिन्न विभागों द्वारा कुल 4.69 करोड़ रुपये की वसूली हुई।

  • राजस्व खंडपीठें : पहली बार जिले के सभी 7 राजस्व अनुभागों (धार, पीथमपुर, धरमपुरी, मनावर, सरदारपुर, बदनावर व कुक्षी) की एसडीएम न्यायालय खंडपीठों ने 322 दर्ज राजस्व मामलों का निपटारा किया।

कुटुम्ब न्यायालय : तीन परिवारों में लौटी खुशियां

कुटुम्ब न्यायालय में प्रधान न्यायाधीश की समझाइश से वर्षों से अलग रह रहे तीन दंपतियों ने साथ रहने का फैसला किया।

  • भरण-पोषण के एक मामले में आवेदिका दीपिका और उनके पति प्रतीक आपसी मतभेद भुलाकर साथ रहने को राजी हुए।

  • लगभग तीन वर्षों से अलग रह रहे एक अन्य दंपति, जिनमें पति के खिलाफ वारंट तक जारी हो चुका था, उन्होंने बच्चों सहित फिर से घर बसाने का निर्णय लिया और एक-दूसरे को माला पहनाई।

  • एक वर्ष से अधिक समय से धारा 9 (दाम्पत्य संबंधों की पुनर्स्थापना) का वाद लड़ रहे तीसरे दंपति ने भी सहमति से नई शुरुआत की। सभी को प्रधान जिला न्यायाधीश द्वारा पौधे भेंट किए गए।

अन्य प्रमुख समझौतों का विवरण

  • 6 साल पुराना पड़ोसी विवाद : व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ खंड की अदालत में वाहन पर पत्थर फेंकने को लेकर वर्ष 2020 से चल रहे आपराधिक प्रकरण में दोनों पक्षों ने समझाइश के बाद रंजिश समाप्त की।

  • चेक बाउंस : चेक अनादरण के तीन प्रमुख मामलों में राजीनामा हुआ, जिसमें 8.50 लाख रुपये और 2.39 लाख रुपये से जुड़े विवाद शामिल रहे।

  • दुर्घटना दावा : चतुर्थ जिला एवं सत्र न्यायालय में लंबित मोटर दुर्घटना दावा प्रकरण में मृतक मनीश के परिजनों (माता श्यामाबाई व बहनों) को बीमा कंपनी की ओर से 14.75 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति राशि पर सहमति बनी।

लोक अदालत जैसी वैकल्पिक विवाद समाधान व्यवस्थाएं न केवल अदालतों से मुकदमों का भारी बोझ कम करती हैं, बल्कि दोनों पक्षों के बीच कटुता समाप्त कर समय और धन की बचत भी सुनिश्चित करती हैं। राजीनामे के बाद वन विभाग के सहयोग से पक्षकारों को जाम, आंवला, बेलपत्र, कटहल और आम के पौधे ‘न्याय वृक्ष’ के रूप में बांटे गए, ताकि यह पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ उनके जीवन में सुलह और नई शुरुआत का स्थायी प्रतीक बने रहें।

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