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खराब भोजन और सजा से नाराज छात्राओं का पैदल मार्च

20 किमी चलकर बिरलाई पहुंचीं 150 छात्राएं

सहायक वार्डन और तीन अतिथि शिक्षकों को हटाने के निर्देश

धार। खराब भोजन, बार-बार की सजा और अनसुनी शिकायतों से उपजा गुस्सा उस वक्त सड़कों पर उतर आया, जब भोर के सन्नाटे में 150 छात्राएं अपने हक की बात सीधे उच्चाधिकारियों तक पहुंचाने के लिए 20 किलोमीटर के लंबे सफर पर पैदल ही निकल पड़ीं।

धार जिले अंतर्गत बाग ब्लॉक के भमोरी स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की 9वीं और 10वीं कक्षा की करीब 150 छात्राएं बुधवार तड़के हॉस्टल से निकलकर एसडीएम कुक्षी से शिकायत करने पैदल ही रवाना हो गईं। करीब 20 किलोमीटर का सफर तय कर छात्राएं ग्राम बिरलाई पहुंचीं, जहां उनकी नाराजगी सहायक वार्डन के व्यवहार, भोजन की घटिया गुणवत्ता और अतिथि शिक्षकों से जुड़ी समस्याओं को लेकर सामने आई।

​छात्राओं के इतनी बड़ी संख्या में निकलने की सूचना मिलते ही शिक्षा विभाग और प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। बीईओ, बीआरसी और हॉस्टल वार्डन ने मामले की सूचना तत्काल कुक्षी एसडीएम आशीष अशोक पाटिल को दी। इसके बाद एसडीएम सहित वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी बिरलाई पहुंचे और छात्राओं से सीधे बात कर उनकी शिकायतें सुनीं। समझाइश के बाद छात्राओं को वाहनों की व्यवस्था कर वापस हॉस्टल भेजा गया।

​छात्राओं ने सहायक वार्डन कुसुम चौहान पर बार-बार अकारण सजा देने और प्रताड़ित करने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि हॉस्टल में निर्धारित मैन्यू के अनुसार भोजन नहीं मिलता और जो मिलता है, उसकी गुणवत्ता बेहद खराब होती है। इसके अलावा अतिथि शिक्षकों की व्यवस्था से जुड़ी परेशानियां भी गिनाई गईं।

छात्राओं का कहना था कि उन्होंने पहले हॉस्टल वार्डन मयतुल बघेल को भी इन समस्याओं से अवगत कराया था, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। वहीं वार्डन मयतुल बघेल का कहना था कि छात्राओं ने सहायक वार्डन के दुर्व्यवहार को लेकर उनसे पहले कोई शिकायत नहीं की थी, अन्यथा समय रहते कदम उठाए जाते।

​छात्राओं के इस कड़े कदम के बाद प्रशासन तत्काल हरकत में आया। एसडीएम आशीष अशोक पाटिल ने मौके पर ही सहायक वार्डन कुसुम चौहान और तीन अतिथि शिक्षकों को हटाने के निर्देश जारी किए। साथ ही बीआरसी धर्मेंद्र ठाकुर सहित विभागीय अधिकारियों को हॉस्टल की बुनियादी व्यवस्थाओं में तत्काल सुधार करने, स्वस्थ व शैक्षणिक मनोरंजन गतिविधियां संचालित करने और एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि भविष्य में छात्राओं को अपनी बुनियादी सुविधाओं के लिए इस तरह सड़कों पर न उतरना पड़े।

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