नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने साधा सरकार और मुख्यमंत्री पर निशाना
धार। जब सत्ताधारी दल के ही जनप्रतिनिधि अपनी सरकार और अपनी ही पार्टी के मंत्रियों के खिलाफ धरने की राह चुन लें, तो प्रशासनिक निष्क्रियता के साथ-साथ राजनीतिक वर्चस्व की दरारें भी खुलकर सामने आ जाती हैं। धार जिले के धरमपुरी विधानसभा क्षेत्र में ऐसा ही एक अभूतपूर्व सियासी टकराव देखने को मिल रहा है, जहां विकास कार्यों की उपेक्षा और एक अधिकारी की कार्यप्रणाली को लेकर भाजपा विधायक ने अपनी ही पार्टी की केंद्रीय राज्यमंत्री के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया है।
मामले की पृष्ठभूमि धार जिले की धामनोद नगर परिषद से जुड़ी है। धरमपुरी से भाजपा विधायक कालू सिंह ठाकुर ने नगर परिषद में विकास कार्य ठप होने और स्थानीय जनसमस्याओं की अनदेखी का आरोप लगाते हुए 9 अक्टूबर से केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री सावित्री ठाकुर के निवास के समक्ष अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठने की औपचारिक घोषणा की है। विधायक का आरोप है कि धामनोद नगर परिषद की सीएमओ माया मंडलोई के कामकाज को लेकर उन्होंने प्रशासन के विभिन्न स्तरों और वरिष्ठ अधिकारियों के सामने बार-बार आवाज उठाई, लेकिन कोई सुनवाई या ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
इस पूरे विवाद पर नगर परिषद सीएमओ माया मंडलोई ने अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि परिषद द्वारा विकास कार्यों को रोका नहीं गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सड़क निर्माण सहित अन्य विकास कार्यों के लिए 22 वर्क ऑर्डर (कार्य आदेश) जारी किए जा चुके हैं, लेकिन संबंधित ठेकेदारों द्वारा काम नहीं किया जा रहा है। सीएमओ के अनुसार, लापरवाह ठेकेदारों को नोटिस जारी करने के साथ ही उनकी धरोहर राशि राजसात करने, टेंडर निरस्त करने और उन्हें ब्लैकलिस्ट करने के लिए परिषद और वरिष्ठ अधिकारियों को पत्राचार किया गया है। इसके अलावा, नगर में एमपीयूडीसी की सीवरेज परियोजना के तहत बिना अनुमति गलियों व सड़कों की खुदाई से अव्यवस्था फैलने को भी निर्माण कार्यों में बाधा बताया गया है। सीएमओ ने यह भी स्पष्ट किया कि लोकायुक्त एफआईआर के मामले में उन्हें इंदौर उच्च न्यायालय से स्थगन आदेश प्राप्त है।
भाजपा के इस अंदरूनी घमासान पर विपक्ष ने भी तीखा हमला बोला है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और गंधवानी विधायक उमंग सिंघार ने सोशल मीडिया पर सरकार को घेरते हुए कहा कि प्रदेश में सरकार के भीतर कोई किसी की सुनने को तैयार नहीं है—विधायक की बात मंत्री नहीं सुन रहीं और अधिकारी विधायक की नहीं सुन रहे। सिंघार ने इसे भाजपा की आंतरिक खींचतान और वर्चस्व की राजनीति करार देते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े किए।
एक ही दल के विधायक और केंद्रीय मंत्री के इस प्रकार आमने-सामने आ जाने से जिले से लेकर भोपाल तक राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। आगामी 9 अक्टूबर को प्रस्तावित इस आंदोलन से न केवल स्थानीय नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं, बल्कि यह भी देखना अहम होगा कि संगठन इस टकराव को टालने के लिए क्या कदम उठाता है और सत्ताधारी दल अपनों के इस असंतोष से कैसे निपटता है।
