धार | एक्सपोजर विजिट हिंसा की शिकार महिलाओं और बालिकाओं को अब न्याय के लिए दर-दर नहीं भटकना होगा। उन्हें एक ही छत के नीचे पुलिस, डॉक्टर और वकील की मदद कैसे मिलती है, यह समझने के लिए शनिवार को धार की छात्राओं ने वन स्टॉप सेंटर का रुख किया।
जिला कार्यक्रम अधिकारी (महिला एवं बाल विकास) सुभाष जैन के निर्देशन में आयोजित इस ‘एक्सपोजर विजिट’ में उत्कृष्ट विद्यालय, भोज कन्या विद्यालय और नर्सिंग कॉलेज ऑफ आहू के छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। बच्चों ने जाना कि मुसीबत के समय कौन सा नंबर डायल करना है और कानून उनके साथ कैसे खड़ा होता है।
एक ही छत के नीचे 5 बड़ी सुविधाएं
हब फॉर इम्पावरमेंट ऑफ वुमन और वन स्टॉप सेंटर की टीम ने छात्राओं को बताया कि केंद्र पर पीड़ित महिलाओं को ये मदद तुरंत मिलती है:
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पुलिस सहायता: बिना किसी डर के रिपोर्ट दर्ज कराना।
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आश्रय: रहने के लिए सुरक्षित स्थान।
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स्वास्थ्य सेवा: तत्काल मेडिकल चेकअप और इलाज।
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परामर्श: मानसिक संबल देने के लिए काउंसलिंग।
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कानूनी मदद: वकील के माध्यम से न्याय की प्रक्रिया।
नए कानूनों की पाठशाला: BNS और कार्यस्थल पर सुरक्षा
विजिट के दौरान विशेषज्ञों ने छात्राओं को कानूनी बदलावों से रूबरू कराया:
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भारतीय न्याय संहिता 2023: इसमें महिलाओं के प्रति अपराधों पर सख्त सजा के प्रावधान।
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कार्यस्थल पर सुरक्षा: यौन उत्पीड़न (निषेध) अधिनियम 2013 की बारीकियां।
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घरेलू हिंसा: 2005 के अधिनियम के तहत महिला ऊर्जा हेल्प डेस्क और महिला थाने की कार्यप्रणाली।
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मुआवजा: भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 के तहत पीड़ितों को मिलने वाली आर्थिक सहायता।
“छात्राओं को जागरूक करना ही हमारा मुख्य उद्देश्य है, ताकि वे न केवल अपने अधिकारों को जानें बल्कि समाज की अन्य महिलाओं की भी मदद कर सकें।” > — सुभाष जैन, जिला कार्यक्रम अधिकारी
पॉकेट गाइड: ये नंबर हमेशा रखें याद
छात्राओं को इमरजेंसी नंबर्स की जानकारी देते हुए उन्हें ‘सेफ्टी पॉकेट गाइड’ की तरह याद कराया गया:
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181: महिला हेल्पलाइन
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112: पुलिस आपातकालीन सेवा
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1930: साइबर अपराध की शिकायत के लिए
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1098: चाइल्ड हेल्पलाइन (बच्चों की मदद के लिए)
विजिट का सार: छात्राओं ने महिला थाने और ऊर्जा डेस्क की कार्यशैली भी देखी, जिससे उनमें वर्दी और कानून के प्रति झिझक दूर हुई और आत्मविश्वास बढ़ा।
