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सोनोग्राफी सेंटर्स पर प्रशासन की पैनी नजर

धार में 4 नए आवेदन आए, कागजों में कमी मिली तो निरस्त होंगे सेंटर; निरीक्षण के सख्त निर्देश

धार | जिले में लिंगानुपात सुधारने और अवैध भ्रूण लिंग परीक्षण पर लगाम कसने के लिए स्वास्थ्य विभाग एक्शन मोड में है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिता सिंगारे की अध्यक्षता में सोमवार को पीसी एंड पीएनडीटी (PC-PNDT) और एमटीपी (MTP) एक्ट के तहत जिला सलाहकार समिति की महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में स्पष्ट किया गया कि अब सोनोग्राफी केंद्रों का संचालन केवल नियमों की कसौटी पर ही हो सकेगा।

ऑनलाइन रडार पर सेंटर्स : 4 आवेदनों की बारीकी से जांच

बैठक में बताया गया कि वर्तमान में एमपी ऑनलाइन के सॉफ्टवेयर के जरिए पारदर्शिता बरती जा रही है।

  • USG सेंटर्स : कुल 4 आवेदन पोर्टल पर हैं, जिनमें 2 नए पंजीयन, 1 नवीनीकरण और 1 संशोधन (Update) के लिए है।

  • MTP सेंटर्स : जिले में नए एमटीपी केंद्र खोलने के लिए भी 2 आवेदन प्राप्त हुए हैं। समिति के सदस्यों ने इन केंद्रों की निरीक्षण रिपोर्ट और अर्हता (Eligibility) संबंधी दस्तावेजों की बारीकी से समीक्षा की। सीएमएचओ ने निर्देश दिए कि जो आवेदन नियमों को पूरा नहीं करते, उन्हें तत्काल निरस्त किया जाए।

निरीक्षण दल को ‘सख्त गाइडलाइन’ : मानकों में कमी मिली तो खैर नहीं

डॉ. अनिता सिंगारे ने निरीक्षण दल को निर्देश दिए कि जिले में संचालित सभी निजी सोनोग्राफी और एमटीपी सेंटर्स का शासन द्वारा निर्धारित फॉर्मेट में ही ऑडिट किया जाए।

  • एक्शन : यदि किसी सेंटर पर निर्धारित मापदंडों के अनुसार रिकॉर्ड या व्यवस्थाओं में कमी पाई जाती है, तो उन पर तुरंत वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

  • फोकस: मुख्य ध्यान जिले के लिंगानुपात को स्थिर करने और एक्ट के उल्लंघन को रोकने पर है।

बैठक में ये रहे मौजूद

बैठक में नोडल अधिकारी डॉ. नंदिता निगम, सिविल सर्जन डॉ. एम.के. बर्मन, लोक अभियोजन अधिकारी के प्रतिनिधि सौभाग्य सिंह खिची, जनसंपर्क अधिकारी वीणा रावत, स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेन्द्र अगलेचा, पैथोलॉजिस्ट डॉ. रिंकु नरगांवे, जिला कार्यक्रम प्रबंधक विरेन्द्र रघुवंशी और अधिवक्ता गोल्डी चौधरी सहित अन्य सदस्य उपस्थित थे।

इनसाइट: पीसी एंड पीएनडीटी एक्ट के तहत सोनोग्राफी सेंटर्स पर कड़े नियमों का पालन अनिवार्य है। प्रशासन की इस सक्रियता से अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगेगा और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा।

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