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2030 तक 500 मिलियन डॉलर निर्यात का टार्गेट, धार का PM मित्रा पार्क बदलेगा गेम

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इंदौर-मालवा को टेक्सटाइल का ग्लोबल हब बनाने का मेगा प्लान

इंदौर/धार। मालवा-निमाड़ के कपड़ा और हस्तशिल्प उद्योग की तकदीर बदलने के लिए सरकार ने कमर कस ली है। इंदौर को टेक्सटाइल सेक्टर में “चैम्पियन डिस्ट्रिक्ट” के रूप में तैयार किया जा रहा है। लक्ष्य बड़ा है— इंदौर के वर्तमान 175.9 मिलियन अमेरिकी डॉलर के वस्त्र निर्यात को साल 2030 तक रॉकेट की रफ्तार देकर 500 मिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब ₹4,000 करोड़ से अधिक) तक पहुंचाना है।

इसी सिलसिले में इंदौर में मध्यप्रदेश शासन और एमपीआईडीसी (MPIDC) द्वारा “जिला निर्यात कार्ययोजना (DEAP)” के तहत एक हाई-लेवल जिला स्तरीय हितधारक परामर्श बैठक आयोजित की गई। एमपीआईडीसी क्षेत्रीय कार्यालय के कार्यकारी संचालक हिमांशु प्रजापति (IAS) की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में उद्योगपतियों, निर्यातकों और अफसरों ने मिलकर भविष्य का पूरा रोडमैप तैयार किया।

गेम चेंजर बनेगा धार का PM मित्रा पार्क

बैठक में सबसे बड़ी चर्चा धार में बन रहे पीएम मित्रा पार्क को लेकर हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पूरी तरह चालू होते ही पूरे रीजन के टेक्सटाइल उद्योग को ‘पंख’ लग जाएंगे। इंदौर न सिर्फ एक मैन्युफैक्चरिंग हब, बल्कि देश का एक बड़ा क्षेत्रीय व्यापार और लॉजिस्टिक्स हब बनकर उभरेगा।

इन 4 सेक्टर्स पर रहेगा ‘स्पेशल फोकस’

निर्यात की रेस में आगे निकलने के लिए सरकार ने चार प्रमुख क्षेत्रों को टॉप प्रायोरिटी पर रखा है:

  1. कॉटन और ऑर्गेनिक कॉटन: पर्यावरण के अनुकूल धागे और कपड़ों की वैश्विक मांग को भुनाना।

  2. होम फर्निशिंग और मेड-अप्स: चादरें, पर्दे और घरेलू सजावटी कपड़ों का बड़ा बाजार तैयार करना।

  3. टेक्निकल टेक्सटाइल्स: मेडिकल, ऑटोमोबाइल और डिफेंस में इस्तेमाल होने वाला स्पेशल कपड़ा।

  4. जीआई टैग ब्रांड्स: प्रदेश की शान— चंदेरी, महेश्वरी और बाघ प्रिंट को ग्लोबल फैशन रैंप तक पहुंचाना।

डिमांड: ‘स्पीड’ बढ़ाने के लिए चाहिए रेल और लैब

बैठक में उद्योग जगत के दिग्गजों ने खुलकर अपनी मांगें रखीं। निर्यातकों ने साफ कहा कि अगर ग्लोबल मार्केट में टिकना है, तो इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करना होगा।

  • इंदौर-मनमाड़ रेल लाइन के काम में तेजी लाई जाए ताकि पोर्ट्स (पोर्ट कनेक्टिविटी) तक पहुंच आसान हो।

  • मालवा में एक मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क और आधुनिक टेक्सटाइल टेस्टिंग लैब की स्थापना जल्द हो।

  • अंतरराष्ट्रीय ट्रेड फेयर्स में स्थानीय बुनकरों और उद्यमियों को मौका मिले।

निमाड़ के तीन जिलों का ‘एक्सपोर्ट मंत्र’

सिर्फ इंदौर ही नहीं, बल्कि धार, खरगोन और बुरहानपुर में भी ऐसी ही मैराथन बैठकें हुईं, जहां हर जिले की ताकत के हिसाब से प्लान बना:

  • धार जिला: यहाँ ‘स्पीड-टू-मार्केट’ (बाजार में जल्द माल पहुंचाना), प्रीमियम टेक्सटाइल, महेश्वरी-बाघ प्रिंट की ब्रांडिंग और डिजिटल वेयरहाउसिंग पर फोकस रहेगा।

  • खरगोन जिला: महेश्वरी साड़ियों और बांस (बैम्बू) आधारित हस्तशिल्प को दुनिया से जोड़ा जाएगा। यहाँ मिनी टेक्सटाइल पार्क और पावरलूम के आधुनिकीकरण की मांग उठी।

  • बुरहानपुर जिला: कपड़े और एग्रो-बेस्ड इंडस्ट्रीज को बिजली की लागत कम करने के लिए सौर ऊर्जा (सोलर पावर) से जोड़ने और एमएसएमई क्लस्टर विकास पर जोर दिया गया।

जुलाई 2026 में ‘भारत टेक्स’ में दिखेगा एमपी का जलवा

अफसरों ने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार उद्योगों के अनुकूल नीतियों में सुधार और निवेश प्रोत्साहन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इसके साथ ही एक बड़ी खुशखबरी यह दी गई कि जुलाई 2026 में आयोजित होने वाले ‘भारत टेक्स 2026’ इंटरनेशनल इवेंट में मध्यप्रदेश अपनी मजबूत और सक्रिय भागीदारी दर्ज कराएगा, जिससे स्थानीय निर्यातकों को दुनिया भर के खरीदार मिल सकेंगे।

जनसमाचार एमपी नोट: मालवा-निमाड़ के चारों जिलों (इंदौर, धार, खरगोन, बुरहानपुर) के इन सुझावों को मिलाकर अब एक अचूक और सॉलिड ‘जिला निर्यात कार्ययोजना’ (DEAP) तैयार की जा रही है। अगर यह प्लान पूरी तरह जमीन पर उतरा, तो आने वाले 4 सालों में हमारे पारंपरिक बुनकरों और कताई मिलों की गूंज सात समंदर पार सुनाई देगी।

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