Headlines

“इतिहास से शक्ति लेकर ही गढ़ा जाता है भविष्य, धार-मांडू-बाग की विरासत अनूठी”

धार का डंका: ‘हेरिटेज संवाद’ में बोले इंटेक चेयरमैन अशोक सिंह ठाकुर

धार | “किसी भी सभ्यता की आत्मा उसकी धरोहरों और सांस्कृतिक विरासत में बसती है। जो समाज अपनी विरासत को सहेजता है, वही इतिहास से शक्ति लेकर सुनहरे भविष्य का निर्माण करता है। धार, मांडू और बाग की ऐतिहासिक धरोहरें केवल पत्थर की इमारतें या स्थापत्य नहीं हैं, बल्कि ये हमारी सांस्कृतिक चेतना और गौरव की जीवित पहचान हैं।”

यह बात इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज (INTACH) के चेयरमैन अशोक सिंह ठाकुर ने धार में कही। वे यहाँ इंटेक धार चैप्टर द्वारा आयोजित “हेरिटेज संवाद” में बतौर मुख्य वक्ता शामिल हुए थे। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज विरासत स्थल भोजशाला के कारण धार की गूंज देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में है।

“धरोहर संरक्षण और नागरिक दायित्व”: सरकार के साथ समाज भी जागे

“धरोहर संरक्षण और नागरिक दायित्व” विषय पर बोलते हुए श्री ठाकुर ने इंटेक के कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि देश में मूर्त और अमूर्त विरासत के संरक्षण में इंटेक हमेशा आगे रहा है। धार चैप्टर की तारीफ करते हुए उन्होंने बताया कि:

  • ऐतिहासिक बावडियों के सूचीकरण में धार चैप्टर ने बेहतरीन काम किया है।

  • कुंभ प्रयागराज, सिंहस्थ उज्जैन और अंचल के प्रसिद्ध आदिवासी लोक पर्व भगोरिया पर धार चैप्टर द्वारा किया गया रिसर्च और डॉक्यूमेंटेशन (दस्तावेजीकरण) वाकई उल्लेखनीय है।

पोस्ट-कोविड बदला ट्रेंड, पर्यटकों की संख्या में भारी उछाल

कार्यक्रम की प्रस्तावना रखते हुए इंटेक धार चैप्टर के संयोजक डॉ. दीपेंद्र शर्मा ने कहा, “हमारी धरोहर ही हमारी असली पहचान है। कोविड के बाद से पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ‘स्वच्छ भारत अभियान’ के तहत सरकार और समाज ने इन स्थलों की सफाई पर विशेष ध्यान दिया है, लेकिन अब इन साफ-सुथरे स्थानों को आगे भी स्वच्छ बनाए रखना हम सभी नागरिकों का परम कर्तव्य है।”

सोशल मीडिया बनेगा धरोहरों का ‘सुरक्षा कवच’ और ‘प्रचारक’

संवाद में युवा शोधार्थी संस्कृति पंवार ने एक बेहद आधुनिक और व्यावहारिक सुझाव रखा। उन्होंने कहा कि आज के दौर में सोशल मीडिया एक सबसे सशक्त माध्यम है। जब भी हम किसी ऐतिहासिक स्थल पर जाएं, तो वहां की तस्वीरें और जानकारी सोशल मीडिया पर जरूर शेयर करें। ये डिजिटल चित्र भविष्य के लिए अपने आप में एक जीवंत प्रमाण बन जाते हैं और इससे हमारी अनमोल धरोहरों का दुनिया भर में सहज प्रचार-प्रसार भी होता है।

वहीं, प्रख्यात कवि डॉ. संदीप शर्मा ने धरोहरों के प्रति संवेदनशीलता पर बात की। उन्होंने कहा कि संरक्षण में सबसे बड़ी बाधा जागरूकता की कमी है। उन्होंने बेहद खूबसूरत पंक्ति साझा करते हुए कहा— “सीख हम बीते युगों से, नए युग का करें स्वागत”। धरोहरें हमारे भूतकाल का आईना ही नहीं, बल्कि भविष्य का मार्गदर्शक भी हैं।

संपत्ति और विरासत का अंतर समझाया, कारवां में जुड़े नए नाम

कार्यक्रम का शानदार संचालन करते हुए शिक्षाविद् व समाजसेवी हरिहरदत्त शुक्ल ने बेहद तार्किक ढंग से ‘सम्पत्ति’ और ‘विरासत’ के बीच के बारीक अंतर को स्पष्ट किया, जिसे उपस्थित श्रोताओं ने खूब सराहा।

कुनबा बढ़ा: 10 नए दिग्गजों ने ली आजीवन सदस्यता

इस गरिमामयी संवाद सभा में इंटेक परिवार का विस्तार भी हुआ। चेयरमैन श्री ठाकुर ने नए सदस्यों— अनुप श्रीवास्तव, डॉ. साधना चौहान, गुंजाली जोशी, गौरव अग्रवाल तथा विक्रमादित्य पंवार को बैज, दिल्ली मुख्यालय से जारी पत्र, रसीद और पहचान पत्र सौंपकर संस्था में स्वागत किया। इंटेक के जमीनी कार्यों से प्रभावित होकर मौके पर ही 10 नए प्रबुद्ध जनों ने संस्था की आजीवन सदस्यता ग्रहण की।

कार्यक्रम के अंत में सभी आगंतुकों का आभार वरिष्ठ नागरिक प्रमोद टोंग्या ने व्यक्त किया। कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी इंटेक सदस्य हरजीत सिंह होड़ा द्वारा मीडिया से साझा की गई।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *