बोले- ‘यह मस्जिद नहीं, महज जिद है, अब यहाँ बने विश्व का सबसे भव्य मंदिर’
धार। धार की ऐतिहासिक भोजशाला में शनिवार 23 मई को देश की दो जानी-मानी हस्तियों-सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ वकील अश्वनी उपाध्याय और विश्व हिंदू परिषद के अंतर्राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हुकुमचंद सांवला ने मां वाग्देवी के दर्शन किये। दोनों नेताओं ने मां वाग्देवी की पूजा-अर्चना कर महाआरती में शामिल हुए। उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ के फैसले के बाद भोजशाला पहुंचे इन दिग्गजों ने सनातनी समाज के संघर्ष को सलाम किया और भोजशाला के प्राचीन गौरव को लौटाने के लिए एक बड़ा रोडमैप सामने रखा।
’तक्षशिला गया, नालंदा-भोजशाला हमारे पास; यहाँ बने ग्लोबल रिसर्च यूनिवर्सिटी’
मां वाग्देवी के दर्शन के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट अश्वनी उपाध्याय भावुक नजर आए। उन्होंने धार के सनातनियों का आभार जताते हुए कहा कि”धार के धर्मप्रेमियों और भोजशाला समिति ने सब कुछ झेलते हुए भी सतत संघर्ष जारी रखा। सनातन की इस जीत के बाद मैं यहाँ माथा टेकने आया हूँ। लेकिन अब सवाल है कि आगे क्या? अब यहाँ विश्व का सबसे सुंदर, भव्य और महत्वपूर्ण मंदिर बनना चाहिए।”
उपाध्याय ने भोजशाला को सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि प्राचीन भारत का ‘नासा’ और ‘इसरो’ बताया। उन्होंने कहा:
- प्राचीन ज्ञान का केंद्र: राजा भोज के समय यह शास्त्रार्थ, यज्ञ विज्ञान, वायु विज्ञान, बाल विज्ञान और ज्योतिष का सबसे बड़ा केंद्र था। यहाँ २५ से ज्यादा विषयों पर रिसर्च होती थी।
- सरस्वती लोक की मांग: “तक्षशिला अब पाकिस्तान में है, लेकिन नालंदा और भोजशाला हमारे पास हैं। सरकार से मांग है कि यहाँ भव्य मंदिर के साथ-साथ ‘सरस्वती लोक’ और एक इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी बनाई जाए, जहां भाभा और इसरो की तरह प्राचीन विज्ञान पर रिसर्च हो।”

‘अंधा व्यक्ति भी छूकर बता देगा कि यह मंदिर है’ – सांवला
विहिप के अंतर्राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हुकुमचंद सांवला ने अपने चिरपरिचित अंदाज में विपक्ष और इतिहास की अनदेखी करने वालों पर तीखा हमला बोला। सांवला ने कहा:
”राजा भोज पहले आए या कमाल मौलाना, इसका फैसला इतिहास खुद कर चुका है। जिसे लोग मस्जिद कहते हैं, वह असल में मस्जिद नहीं, बल्कि मुसलमानों की ‘महज जिद’ है।”
सांवला ने आगे कहा कि भोजशाला के साक्ष्य और नक्काशीदार स्तंभ खुद चिल्ला-चिल्ला कर अपनी कहानी कह रहे हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से अपील की कि न्यायाधीश स्वयं यहाँ आकर निरीक्षण करें। साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि लंदन में कैद मां वाग्देवी की मूल प्रतिमा को जल्द से जल्द भारत लाकर यहाँ पुनर्स्थापित किया जाए।
अखंड ज्योति के दर्शन, भगवा दुपट्टे से हुआ स्वागत
भोजशाला मुक्ति यज्ञ के संयोजक गोपाल शर्मा और महाप्रबंधक हेमंत दोराया ने दोनों अतिथियों को पूरी भोजशाला का भ्रमण कराया। अतिथियों ने गर्भगृह में जल रही अखंड ज्योति के दर्शन किए। इस दौरान समिति के पदाधिकारियों ने सालों तक चले सत्याग्रह और संघर्ष की गाथा भी साझा की।
सनातनी परंपरा के अनुसार दोनों अतिथियों का भगवा उपरणा (दुपट्टा) पहनाकर सम्मान किया गया। इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बनने के लिए समिति के महामंत्री सुमित चौधरी, विनय दीक्षित, प्रज्ञा प्रवास, क्षेत्रीय संयोजक राजभाऊ भदाने, रवि सिकरवार, बडू भाबर, नीलेश व्यास, रामेश्वरम, जिला मीडिया आयाम प्रमुख स्वप्निल जैन, ज्योतिषाचार्य और भारी संख्या में मातृशक्ति एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी समिति के मीडिया प्रमुख मोहन राठौर ने दी।
