कलेक्टर और एसपी को ज्ञापन सौंपकर किया कड़ा विरोध
धार। ऐतिहासिक भोजशाला परिसर में अदालती निर्देशों के अनुपालन और आसपास की व्यवस्थाओं को लेकर एक बार फिर प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। संरक्षित स्मारक के 100 मीटर के दायरे में नमाज की अनुमति, मार्ग अवरुद्ध होने और कथित अतिक्रमण को लेकर हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने जिला प्रशासन के समक्ष कड़ा विरोध दर्ज कराया है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि न्यायालय के आदेशों की भावना के अनुरूप परिसर की व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं।
हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के पदाधिकारियों (जिला अध्यक्ष कन्हैयालाल यादव, नगर अध्यक्ष मनीष मकवाने और प्रदेश उपाध्यक्ष आशीष गोयल) ने कलेक्टर राजीव रंजन मीना और एसपी सचिन शर्मा को एक ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (इंदौर खंडपीठ) और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा भोजशाला को माँ सरस्वती मंदिर व संस्कृत शिक्षा केंद्र मान्य किए जाने के बाद भी नियमों की अनदेखी हो रही है। संगठन का कहना है कि 14 अगस्त को नमाज के दौरान निर्धारित मार्ग अवरुद्ध हुआ और सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रस्तावित खसरा नंबर 596 के बजाय खसरा नंबर 612 पर स्थानीय विरोध के बावजूद नमाज करवाई जा रही है।
ज्ञापन में उठाए गए मुख्य बिंदु:
- अदालती आदेश और ASI का निर्देश : उच्च न्यायालय के 15 मई के निर्णय और ASI के 16 मई के आदेश के तहत हिंदुओं को सूर्योदय से सूर्यास्त तक अबाध पूजा के अधिकार दिए गए हैं, जबकि परिसर में नमाज पर रोक है। संगठन के अनुसार इस आदेश पर कोई स्थगन नहीं है।
- खसरा नंबर 612 पर आपत्ति : संगठन ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने खसरा नंबर 596 पर दोपहर 1 से 3 बजे तक अस्थायी व्यवस्था की बात कही थी। आपसी सहमति के बिना खसरा 612 पर नमाज की अनुमति से वहां खेती करने वाले स्थानीय रहवासियों का जीवन प्रभावित हो रहा है।
- 100 मीटर संरक्षित क्षेत्र का नियम : स्मारक के 100 मीटर क्षेत्र का तुरंत सीमांकन (मार्किंग) करने की मांग की गई है। संगठन का तर्क है कि यदि इस दायरे में अस्थायी नमाज की अनुमति है, तो उसी आधार पर हिंदू समाज को भी धार्मिक आयोजनों की छूट मिलनी चाहिए।
- अतिक्रमण और सरस्वती लोक : मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप प्रस्तावित ‘माँ सरस्वती लोक’ और ‘राजा भोज शोध केंद्र’ के निर्माण के लिए 100 मीटर क्षेत्र से सभी प्रकार के अतिक्रमण तुरंत हटाने की मांग रखी गई है।
- कानूनी व्याख्या की मांग : प्रशासन से आग्रह किया गया है कि आदेशों की स्पष्टता के लिए भारत सरकार के अटॉर्नी जनरल, सॉलिसिटर जनरल और मध्य प्रदेश के महाधिवक्ता से पुनः कानूनी राय ली जाए।
इस ज्ञापन की प्रतिलिपियां प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, केंद्रीय संस्कृति मंत्री, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री, महानिदेशक (ASI) और पुलिस अधीक्षक को भी भेजी गई हैं। भोजशाला क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और ‘सरस्वती लोक’ के भावी विकास को लेकर 100 मीटर संरक्षित क्षेत्र की मार्किंग तथा नमाज स्थल का चयन आने वाले दिनों में प्रशासनिक स्तर पर एक अहम निर्णय का विषय बन सकता है। संगठन ने प्रशासन से सभी बिंदुओं पर शीघ्र निराकरण की मांग की है।
