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धार में दूषित पानी पर सियासत गर्म: कांग्रेस प्रवक्ता का आरोप-‘बोरिंग के पानी को नल का बताकर नाकामी छुपा रहे सीएमओ’

‘शहर में सिर्फ 10 दिन का पानी शेष, प्रशासन मौन’, कांग्रेस ने जनता से की सड़कों पर उतरने की अपील

धार। धार नगर में दूषित पानी की आपूर्ति और आसन्न जल संकट को लेकर मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) कुंवर विश्वनाथ सिंह और सत्ताधारी दल के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए जिला कांग्रेस प्रवक्ता अजय सिंह ठाकुर ने एक वीडियो जारी कर गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस प्रवक्ता ने स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर जनता की सुध न लेने तथा अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए झूठे वीडियो बनाने का आरोप लगाया है।

ठाकुर ने सिलसिलेवार घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि जब भी धार नगर के कोने-कोने से गंदे पानी की शिकायत उठती है, तो सीएमओ सुधार करने के बजाय उसे छुपाने का प्रयास करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि हाल ही में शरद नगर में शुद्ध पानी दिखाने का जो वीडियो बनाया गया था, वह नगर पालिका के अपने ही कर्मचारी का घर था, जबकि उसके आसपास के इलाकों में गंदा पानी आ रहा था।

इसके बाद जब पुनः आवाज उठाई गई, तो सीएमओ ने रासमंडल क्षेत्र (जो कि कांग्रेस प्रवक्ता की पार्षद पत्नी का क्षेत्र है) का दौरा किया। आरोप है कि वहां उन्होंने बोरिंग के पानी को पीकर उसे पत्रकारों के माध्यम से शुद्ध ‘नल का पानी’ बताने की कोशिश की। बाद में अपनी गलती स्वीकार करने के बजाय उन्होंने कह दिया कि वह केवल बोरिंग को ही चेक करने गए थे।

शहर के विभिन्न क्षेत्रों की स्थिति और आगामी संकट

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि सीएमओ और सत्तारूढ़ दल की यह हठधर्मिता सीधे जनता पर थोपी जा रही है। शहर के कई प्रमुख इलाकों पो चोपाटी, नौगांव, शरद नगर, अर्जुन कॉलोनी, बख्तावर मार्ग से लगातार गंदे पानी की शिकायतें, तस्वीरें और वीडियो सामने आ रहे हैं। अजय सिंह ठाकुर ने खुलासा किया कि वर्तमान में धार शहर में तालाबों से जो पानी दिया जा रहा है, वह बिल्कुल निचले स्तर (डेड स्टोरेज) पर पहुंच चुका है और शहर में मात्र 10 दिन का पानी शेष बचा है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि मानसून आने में देरी हो जाती है, तो प्रशासन के पास आगे की पानी सप्लाई के लिए क्या वैकल्पिक व्यवस्था है?

जनप्रतिनिधियों के मौन पर सवाल और आंदोलन का आह्वान

इस पूरे मामले पर जिला कांग्रेस प्रवक्ता ने जिले के वरिष्ठ अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर गहरा असंतोष व्यक्त किया है। उन्होंने सीधे तौर पर कलेक्टर, नगरीय प्रशासन मंत्री, स्थानीय विधायक और सांसद की भूमिका पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि आखिर धार की जनता को इस संकट के समय लावारिस क्यों छोड़ दिया गया है।

समाचार के अंत में, ठाकुर ने धार नगर की जनता से अपील की है कि चूंकि पूरा प्रशासन और जनप्रतिनिधि सोए हुए हैं, इसलिए अब नागरिकों को अपने बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य तथा जान-माल की सुरक्षा के लिए, और बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर सड़कों पर उतरकर अपनी आवाज मुखर करनी होगी।

धार नगर में यह मामला आने वाले दिनों में एक बड़े जन-आंदोलन का रूप ले सकता है, क्योंकि कांग्रेस प्रवक्ता ने सीधे तौर पर जनता को सड़कों पर उतरने का आह्वान किया है। यदि अगले एक हफ्ते के भीतर मानसून की आमद नहीं होती है या प्रशासन द्वारा शुद्ध पेयजल की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की जाती है, तो शहर में पानी को लेकर कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है। साथ ही, तालाबों के सूखते जलस्तर को देखते हुए यदि यह राजनीतिक गतिरोध जारी रहा, तो पेयजल का यह मुद्दा आगामी समय में स्थानीय राजनीति का मुख्य केंद्र बिंदु बनेगा।

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