अवैध शराब परिवहन, कूटरचित परमिटों के उपयोग और राजस्व को नुकसान पहुँचाने जैसे गंभीर आरोप सोम डिस्टिलरीज समूह पर
भोपाल। मध्यप्रदेश की मोहन यादव सरकार ने अपनी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत सख्त कदम उठाते हुए सोम डिस्टिलरीज समूह की इकाइयों के लिए वर्ष 2026-27 के आबकारी लाइसेंस नवीनीकरण संबंधी आवेदन निरस्त कर दिए हैं। आबकारी आयुक्त द्वारा जारी यह निर्णय राज्य में भ्रष्टाचार, अवैध कारोबार और नियमों के उल्लंघन के खिलाफ सरकार की कड़ी प्रतिबद्धता को स्पष्ट करता है। इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य राज्य में विधि के शासन, सुशासन और पारदर्शिता को सुनिश्चित करना है।
आबकारी आयुक्त द्वारा जारी आदेश में यह स्पष्ट किया गया है कि किसी भी संस्था के लिए लाइसेंस का नवीनीकरण कोई स्वचालित प्रक्रिया या अधिकार नहीं है। इसके लिए संस्था के समग्र आचरण, विधिक अनुपालन, लाइसेंस की शर्तों का पालन, नियामकीय पात्रता और सार्वजनिक हित जैसे मानकों पर खरा उतरना अनिवार्य है। यह निर्णय मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम 1915, संबंधित नियमों और माननीय उच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के गहन परीक्षण के बाद लिया गया है।
इस निर्णय के पीछे समूह से जुड़े पिछले मामलों का भी बड़ा प्रभाव रहा है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, संबंधित समूह के खिलाफ पूर्व में अवैध शराब परिवहन, कूटरचित परमिटों के उपयोग और शासकीय राजस्व को नुकसान पहुँचाने जैसे गंभीर आरोप सामने आए थे, जो विभिन्न न्यायालयों में विचारित रहे। सरकार ने उपलब्ध साक्ष्यों, जांच रिपोर्टों और न्यायिक अभिलेखों की समीक्षा के उपरांत यह कदम उठाया है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का मानना है कि राज्य में निवेश और उद्योग जगत को प्रोत्साहन देना सरकार की प्राथमिकता है, लेकिन यह विकास नियमों के दायरे में ही होना चाहिए। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि प्रदेश में कानून से ऊपर कोई नहीं है और जो भी संस्था जनहित के विरुद्ध कार्य करेगी, उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
सोम डिस्टिलरीज पर की गई यह कार्रवाई प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था में एक नज़ीर के रूप में देखी जा रही है। यह न केवल राज्य सरकार के ‘जीरो टॉलरेंस अगेंस्ट इल्लीगल एक्टिविटीज’ (अवैध गतिविधियों के खिलाफ शून्य सहनशीलता) रुख को पुष्ट करती है, बल्कि यह संकेत भी देती है कि भविष्य में प्रशासनिक तंत्र में जवाबदेही और अधिक कड़ाई से लागू की जाएगी। इस कदम से आम नागरिकों का कानून व्यवस्था में विश्वास और मजबूत होगा कि प्रत्येक निर्णय निष्पक्षता और जनहित को ध्यान में रखकर लिया जा रहा है।
