तीन मंजिला मकान में चल रही थी अवैध शराब फैक्ट्री, मुख्य आरोपी गिरफ्तार
इंदौर। सुरक्षित और शांत माने जाने वाले इंदौर के तुलसी नगर क्षेत्र में उस समय हड़कंप मच गया, जब आबकारी विभाग की टीम ने एक आलीशान तीन मंजिला मकान में चल रही अवैध शराब फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया। ब्रांडेड बोतलों के ढक्कन, नकली होलोग्राम और ब्लेंडर मशीनों के बीच यहाँ बड़े पैमाने पर मिलावटी और अवैध शराब तैयार की जा रही थी। आबकारी विभाग को इस छापेमारी में एक ऐसे अंतरराज्यीय गिरोह के सुराग मिले हैं, जिसके तार मध्य प्रदेश से लेकर राजस्थान तक जुड़े हुए हैं।
कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देश और सहायक आबकारी आयुक्त अभिषेक तिवारी के मार्गदर्शन में इस बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया गया। विभाग को बुधवार रात लगभग 8:00 बजे इस अवैध कारखाने की सटीक सूचना मिली थी। इसके बाद अधिकारियों ने तुरंत एक विशेष टीम का गठन किया, जिसमें सहायक जिला आबकारी अधिकारी, उपनिरीक्षक और आरक्षक शामिल थे। टीम ने पूरी योजना के साथ तुलसी नगर के इस रिहायशी इलाके में स्थित मकान पर दबिश दी और मौके से फैक्ट्री के मालिक व मुख्य आरोपी विनोद पलैया को गिरफ्तार कर लिया।
छापेमारी में जब्त सामग्री और उसकी कीमत
आबकारी टीम ने मौके से भारी मात्रा में अवैध शराब और उसे बनाने के उपकरण जब्त किए हैं, जिनकी कुल अनुमानित कीमत लगभग 10 लाख रुपये है:
- तैयार मदिरा: 144 बल्क लीटर (लगभग 15 से 20 पेटी) देशी मदिरा।
- कच्चा माल: शराब बनाने में इस्तेमाल होने वाला स्प्रिट और कैरेमल।
- मशीनें: दो बड़ी ब्लेंडिंग मशीनें और लेबल लगाने की मशीन।
- पैकेजिंग सामग्री: विभिन्न ब्रांडों के हजारों नकली लेबल, फर्जी होलोग्राम, बोतलों के कैप और कागजी कार्टून।
ऐसे खुला अंतरराज्यीय नेटवर्क का राज
जांच के दौरान आबकारी विभाग को मकान से राजस्थान में बिकने वाले प्रसिद्ध ब्रांड ‘केसर कस्तूरी’ के लेबल और पैकेजिंग सामग्री भी मिली है। इसके अलावा मध्य प्रदेश के अलग-अलग जिलों में बिकने वाली मदिरा और अंग्रेजी शराब के लेबल भी बरामद हुए हैं। इससे साफ संकेत मिलते हैं कि आरोपी यहाँ शराब बनाकर मध्य प्रदेश के साथ-साथ राजस्थान की सीमावर्ती दुकानों में भी सप्लाई कर रहा था।
पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी विनोद पहले शराब व्यवसाय से जुड़ा रहा है और दुकानों में काम कर चुका है। इसी अनुभव का फायदा उठाकर ज्यादा पैसा कमाने के लालच में उसने यह अवैध कारोबार शुरू किया। घर से मिले दस्तावेजों के मुताबिक यह अवैध फैक्ट्री पिछले एक से डेढ़ साल से लगातार संचालित हो रही थी, जिससे सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुँचा है। हालांकि, सटीक आंकड़ा जांच के बाद ही साफ हो पाएगा।
आगे की कार्रवाई
आबकारी विभाग ने मुख्य आरोपी विनोद के खिलाफ मध्य प्रदेश आबकारी अधिनियम की सुसंगत धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। जब्त की गई शराब और सामग्री को वैज्ञानिक व तकनीकी जांच के लिए भेजा जा रहा है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह शराब सेहत के लिए कितनी खतरनाक या जहरीली थी। विभाग अब इस पूरे अंतरराज्यीय नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुट गया है, ताकि इस गिरोह को जड़ से खत्म किया जा सके।
