सुरक्षा के बीच धार में निकले 150 से ज्यादा ताजिये, हिंदू-मुस्लिम समुदाय ने चढ़ाए सेहरे
धार। पिछले कई दिनों से जारी कशमकश और सन्नाटे को तोड़ते हुए जैसे ही शहर का इमामबाड़ा खुला, धार एक बार फिर अकीदत (श्रद्धा) और सांस्कृतिक रंगत से सराबोर हो उठा। मोहर्रम और अन्य कार्यक्रमों के बहिष्कार के बाद सूने पड़े शहर में उस समय रौनक लौट आई, जब इमामबाड़ा खुलने के बाद पूरी अकीदत के साथ ताजियों का भव्य जुलूस निकाला गया। इस ऐतिहासिक और भावुक क्षण में हज़ारों लोग शामिल हुए, जिससे पूरा माहौल ‘या हुसैन’ के नारों और मर्सिया (शोक गीतों) से गूंज उठा।
मोहर्रम की नौवीं तारीख को धार शहर के सभी मोहल्लों के अखाड़े एक साथ निकाले गए। सुबह तड़के 4 बजे सबसे पहले सरकारी ताजिये की सलामी की रस्म अदा की गई। इसके बाद शहरभर के विभिन्न इलाकों से 150 से अधिक ताजियों का इमामबाड़े पहुंचने का सिलसिला शुरू हुआ। इमामबाड़ा खुलते ही वहां साफ-सफाई कर सरकारी ताजिया रखा गया, जहां हिंदू और मुस्लिम दोनों ही समुदायों की भारी भीड़ सेहरे चढ़ाने के लिए उमड़ पड़ी। यह जुलूस हटवाड़े से शुरू होकर आनंद चौपाटी, एमजी रोड, धानमंडी, भाजीबाजार, पट्ठा चौपाटी, मुरादपुरा, पुरानी नगर पालिका, पिंजारवाडी, उटावद दरवाजा, मोहन टॉकीज और बख्तावर मार्ग जैसे प्रमुख मार्गों से होता हुआ अंततः छत्री पाल स्थित कर्बला देर रात तक पहुंचेगा। जहां ताजियों को अदब के साथ विसर्जन किया जाएगा।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
पूरे आयोजन को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए प्रशासन पूरी तरह अलर्ट रहा। देर रात तक कलेक्टर राजीव रंजन मीना, एसपी सचिन शर्मा, एएसपी विजय डावर, एएसपी पारुल बेलापुरकर, एसडीएम राहुल गुप्ता, डीएसपी आनंद तिवारी, सीएसपी गगन, कोतवाली टीआई दीपक सिंह चौहान, राजगढ़ टीआई समीर पाटीदार और नौगांव टीआई हीरू सिंह रावत सहित 400 से अधिक पुलिस बल के जवान चप्पे-चप्पे पर तैनात रहे।
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