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दहेज लोभियों की हैवानियत : जिसे विदा कर लाए, उसी मासूम को गालियां दे बेरहमी से पीटकर घर से निकाला

धार। शादी के पवित्र मंडप में सात फेरे लेते समय जिस दूल्हे और परिवार ने उम्र भर साथ निभाने का वादा किया था, वही चंद रुपयों और दहेज की लालच में कसाई बन गए। एक 23 साल की मासूम बेटी, जो अपने सुनहरे भविष्य के सपने संजोकर ससुराल आई थी, उसे वहां सिर्फ जिल्लत, दर्द और गालियां मिलीं। मामला इंदौर के बाणगंगा इलाके का है, जहां एक विवाहिता को दहेज के भूखे भेड़ियों ने इस कदर प्रताड़ित किया कि उसे न्याय के लिए पुलिस की चौखट पर आना पड़ा।

यह झकझोर देने वाली कहानी रचना (23 वर्ष) की है, जिसका विवाह मारुति नगर (इंदौर) के रहने वाले अंकित सिंह देवड़ा के साथ बड़ी उम्मीदों से हुआ था। लेकिन शादी के कुछ ही समय बाद पति अंकित, सास गुलाब बाई और ससुर मोहनसिंह देवड़ा की नजरें रचना के रूप-रंग और गुणों पर नहीं, बल्कि मायके से मिलने वाले दहेज पर टिक गईं।

महीनों तक सहा टॉर्चर, दी जान से मारने की धमकी

महिला थाने में दर्ज कराई गई रिपोर्ट के मुताबिक, प्रताड़ना का यह खौफनाक दौर 10 अगस्त 2025 से शुरू होकर 1 मार्च 2026 तक लगातार चलता रहा।

“ससुराल वालों ने मासूम रचना को दहेज के लिए इस कदर मानसिक और शारीरिक रूप से तोड़ा कि उसका हौसला जवाब दे गया। आरोप है कि पति, सास और ससुर मिलकर उसे आए दिन बेरहमी से पीटते थे। इतना ही नहीं, मर्यादा की सारी हदें पार करते हुए उसे मां-बहन की गंदी-गंदी गालियां दी जाती थीं और विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी जाती थी।”

आखिरकार, इस जुल्म से तंग आकर रचना को अपना ससुराल छोड़ना पड़ा और वह धार के नौगांव थाना क्षेत्र की अभ्युदय विहार कॉलोनी में आकर रहने लगी।

जांच के बाद पुलिस ने दर्ज किया केस

पीड़िता ने अपने साथ हुए इस अन्याय की शिकायत पुलिस से की थी। आवेदन की लंबी जांच के बाद, आखिरकार सोमवार 29 जून को महिला थाना पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कदम उठाया है।

पुलिस ने आरोपी पति अंकित, सास गुलाब बाई और ससुर मोहनसिंह देवड़ा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और दहेज प्रतिषेध अधिनियम की गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है:

  • BNS की धाराएं: 85 (महिला के साथ क्रूरता), 296(a) (अश्लील हरकतें/गाली-गलौज), 115(2) (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना), 351(2) (आपराधिक धमकी), और 3(5) (समान मंशा)।
  • दहेज प्रतिषेध अधिनियम: धारा 3 और 4 (दहेज लेने या देने के लिए दंड)।

आज के इस आधुनिक दौर में भी क्या बेटियां सिर्फ दहेज की बलि चढ़ने के लिए ब्याही जाती हैं? आखिर कब थमेगा चंद रुपयों के लिए एक हंसती-खेलती जिंदगी को नरक बनाने का यह सिलसिला? फिलहाल, पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और पीड़िता को न्याय का इंतजार है।

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