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धार जेल में ‘इंसाफ’ और ‘सेहत’ का मेला: प्रधान जिला न्यायाधीश ने दी चिलम और सुराही की सीख

धार | उच्च न्यायालय मध्य प्रदेश के निर्देशानुसार जिला जेल धार में रविवार को मानवीय संवेदनाओं और न्याय का संगम देखने को मिला। यहाँ न केवल विशेष जेल लोक अदालत के जरिए बंदियों को रिहाई का मार्ग मिला, बल्कि मेगा स्वास्थ्य शिविर के माध्यम से 300 बंदियों का चेकअप भी किया गया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीमती ममता जैन रहीं।

गलती मान लेना ही जीवन की सबसे बड़ी जीत

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि ममता जैन ने बंदियों को जीवन दर्शन से जोड़ा। उन्होंने कुम्हार, चिलम और सुराही का प्रेरक उदाहरण देते हुए कहा कि मनुष्य की सोच ही उसके भविष्य को आकार देती है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा— “अपनी गलती को स्वीकार कर लेना ही असल में जीवन की सबसे बड़ी जीत है। अगर इंसान का मन सुधर जाए, तो आपसी सहमति से बड़े से बड़े मामले हल किए जा सकते हैं।”

लोक अदालत: सुरेश के लिए खुला रिहाई का रास्ता

विशेष लोक अदालत के दौरान पात्र प्रकरणों की समीक्षा की गई। इसमें सुरेश पिता शंकरलाल के मामले का आपसी समझौते के आधार पर मौके पर ही निराकरण किया गया। फैसले के बाद उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया। इसके अलावा, जेल में न्याय प्रक्रिया को आधुनिक बनाने के लिए 4 नए वीसी (वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग) कक्षों का भी शुभारंभ किया गया।

300 बंदियों की जांच, विशेषज्ञों ने दी सलाह

न्याय के साथ-साथ सेहत पर भी जोर रहा। मेगा शिविर में जिला और निजी अस्पतालों के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने 300 कैदियों की जांच की।

  • दवा वितरण: मौके पर ही जरूरी दवाइयां बांटी गईं।
  • हायर सेंटर रेफर: गंभीर शिकायतों वाले बंदियों को जिला अस्पताल में विस्तृत जांच की सलाह दी गई।
  • टीम में शामिल: डॉ. संजय भण्डारी, डॉ. वैभव बौरासी और डॉ. निधिश गुप्ता सहित मेडिकल स्टाफ ने सेवाएं दीं।

इनकी रही मौजूदगी

कार्यक्रम में सीजेएम नताशा शेख पटेल, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव प्रदीप सोनी, जेल अधीक्षक आर.आर. डांगी, जिला विधिक सहायता अधिकारी सिमोन सुलिया और पैरालीगल वॉलंटियर अर्चना मुकाती सहित जेल प्रशासन का स्टाफ मौजूद रहा।

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