धार को मिला 20 हजार नए सदस्य बनाने का लक्ष्य; प्रभारी कलेक्टर ने जागरूकता रथ को दिखाई हरी झंडी
धार। प्रदेश सरकार द्वारा घोषित ‘कृषक कल्याण वर्ष 2026’ के संकल्प को जमीन पर उतारने के लिए जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। सहकारिता के दायरे को बढ़ाने और गांव के अंतिम किसान को बैंकिंग सिस्टम से जोड़ने के लिए मंगलवार को जिले में एक व्यापक अभियान का शंखनाद किया गया। प्रभारी कलेक्टर अभिषेक चौधरी ने कलेक्ट्रेट परिसर से जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
यह प्रचार वाहन जिले के गांव-गांव जाकर किसानों को बी-पैक्स (बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि साख सहकारी संस्थाओं) की सदस्यता लेने के लिए प्रेरित करेगा। इस अवसर पर उपायुक्त सहकारिता वर्षा श्रीवास और जिला सहकारी बैंक के सीईओ केके रायकवार भी मौजूद रहे।
प्रदेश में 10 लाख, धार में 20 हजार का लक्ष्य
सहकारिता विभाग ने इस साल पूरे प्रदेश में 10 लाख नए सदस्य बनाने का महा-लक्ष्य रखा है। इसमें धार जिले की जिम्मेदारी 20 हजार नए सदस्यों को जोड़ने की है। प्रशासन का फोकस उन छोटे और सीमांत किसानों पर है, जो अब तक सहकारी समितियों के दायरे से बाहर हैं।
खास बात: आखिर क्यों जरूरी है बी-पैक्स की सदस्यता?
समिति का सदस्य बनने पर किसानों को सीधे तौर पर ये बड़े फायदे मिलेंगे:
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0% ब्याज योजना: खेती-किसानी के लिए बिना ब्याज के ऋण (Loan) की सुविधा।
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सीधा लाभ: खाद, बीज और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ बिना बिचौलियों के।
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बैंकिंग सुविधा: जिला सहकारी बैंक से जुड़ी संस्थाओं के माध्यम से वित्तीय समावेशन।
कलेक्टर की अपील: योजनाओं का उठाएं सीधा लाभ
“जिले का कोई भी पात्र किसान सहकारिता के लाभ से वंचित न रहे, यही हमारा उद्देश्य है। जागरूकता रथ के माध्यम से हम किसानों को बता रहे हैं कि सदस्य बनकर वे शासन की शून्य प्रतिशत ब्याज योजना का लाभ कैसे ले सकते हैं।” — अभिषेक चौधरी, प्रभारी कलेक्टर
एक्सपर्ट व्यू: मजबूत होगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था
सहकारिता विभाग के अधिकारियों के अनुसार, बी-पैक्स संस्थाओं के सुदृढ़ीकरण से ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। नवीन सदस्यों के जुड़ने से समितियों की कार्यक्षमता बढ़ेगी और किसानों को खाद-बीज के लिए निजी साहूकारों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
