104 फरियादियों की सुनी गुहार
धार। जिला मुख्यालय पर मंगलवार को आयोजित साप्ताहिक जनसुनवाई में उस वक्त प्रशासनिक कसावट देखने को मिली, जब प्रभारी कलेक्टर श्री अभिषेक चौधरी ने अधिकारियों को दो टूक शब्दों में कह दिया— “आमजन की समस्या का समाधान हमारी टॉप प्रायोरिटी है, फाइलों को अलमारी में नहीं, समाधान की मेज पर रखें।”
दोपहर तक चली इस जनसुनवाई में जिले के दूर-दराज के गांवों से आए 104 आवेदकों ने अपनी पीड़ा साझा की। प्रभारी कलेक्टर ने न केवल आवेदन लिए, बल्कि कई मामलों में मौके पर मौजूद विभागीय अधिकारियों को तलब कर ‘ऑन द स्पॉट’ जवाब-तलब किया।
मौके पर ही क्लास: “तकनीकी दिक्कत है तो आवेदक को समझाएं, लटकाएं नहीं”
सुनवाई के दौरान प्रभारी कलेक्टर श्री चौधरी एक-एक आवेदक के पास पहुँचे। जब कुछ मामलों में देरी की बात सामने आई, तो उन्होंने कड़े निर्देश देते हुए कहा कि जनसुनवाई के आवेदनों को लंबित रखना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी काम में तकनीकी पेंच है, तो आवेदक को स्पष्ट रूप से बताएं ताकि वह भटकने को मजबूर न हो।
इन मुद्दों पर रही सबसे ज्यादा भीड़
जनसुनवाई में आवेदनों का अंबार लगा रहा, जिनमें मुख्य रूप से निम्नलिखित मामले छाए रहे:
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- आर्थिक एवं पेंशन: विधवा और वृद्धावस्था पेंशन के रुके हुए मामले।
- जमीन का पेंच: भूमि अतिक्रमण और राजस्व विभाग से जुड़े सीमांकन के आवेदन।
- अनुकंपा नियुक्ति: लंबे समय से अटके अनुकंपा नियुक्ति के प्रकरण।
- स्वास्थ्य एवं मदद: गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए आर्थिक सहायता की गुहार।
जनता और प्रशासन के बीच कम होती दूरी
अक्सर जनसुनवाई केवल आवेदन जमा करने का जरिया बन जाती है, लेकिन आज की जनसुनवाई में प्रभारी कलेक्टर का सीधा संवाद और अधिकारियों से तत्काल जवाब मांगना यह दर्शाता है कि प्रशासन अब ‘रिजल्ट ओरिएंटेड’ वर्किंग की ओर बढ़ रहा है। अपर कलेक्टर संजीव केशव पाण्डेय की मौजूदगी में अधिकारियों की टीम को यह कड़ा संदेश गया है कि लापरवाही की गुंजाइश शून्य है।
मौके पर मौजूदगी: इस दौरान जिले के तमाम विभागों के आला अधिकारी मौजूद रहे, जिन्हें प्राप्त आवेदनों को समय-सीमा (Time-limit) में निराकृत करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
