कहीं श्रमदान तो कहीं प्याऊ से बुझ रही प्यास
धार। मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद के नेतृत्व में धार जिले के गाँव-गाँव में ‘जल गंगा संवर्धन अभियान 2026’ का दूसरा चरण अब एक जन-आंदोलन का रूप ले चुका है। जिले के अलग-अलग विकासखंडों में कहीं दीवारों पर लिखे नारे ग्रामीणों को ‘पानी का मोल’ समझा रहे हैं, तो कहीं जल चौपालों के जरिए पुराने कुएं और बावड़ियों को नया जीवन देने की शपथ ली जा रही है।
जेतपुरा से नागदा तक: दीवारों ने बोला- ‘पानी बचाओ’
धार विकासखंड के जेतपुरा सेक्टर में नवांकुर संस्थाओं ने अनूठा तरीका अपनाया। लेबड, दंगोठा, नेकपुर और बग्गड में दीवारों पर नारा लेखन कर ग्रामीणों को बताया गया कि आने वाली पीढ़ी के लिए पानी क्यों जरूरी है। वहीं, बदनावर के नागदा, कुसावदा और किसनपुरा में भी ‘नारी शक्ति’ ने मोर्चा संभाला और प्रेरक नारों के जरिए जल संरक्षण का संकल्प दिलाया।
तीन तस्वीरें: जो बताती हैं अभियान का असर
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तस्वीर 1 (कनावल): पिपल्या सेक्टर के ग्राम कनावल में जल संगोष्ठी हुई। यहाँ ग्रामीणों को सिखाया गया कि कैसे छोटे-छोटे ‘सोखता गड्ढे’ बनाकर जमीन के गिरते जल स्तर को थामा जा सकता है।
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तस्वीर 2 (कुवाली): उमरबन के कुवाली में ‘जल चौपाल’ सजी। दाभड आदिवासी विकास सेवा समिति के अध्यक्ष बालू सिंह कनेर ने पशुपालन और खेती के लिए जल संचय के पुराने तरीकों को फिर से अपनाने पर जोर दिया। इसके बाद सदस्यों ने खुद फावड़ा उठा कर हैंडपंप के पास सफाई की।
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तस्वीर 3 (निसरपुर/धामनोद): निसरपुर की टीम ने कोटेश्वर घाट पर विशेष सफाई अभियान चलाकर घाटों को चमकाया, तो वहीं धामनोद नगर परिषद में तपती गर्मी के बीच राहगीरों के लिए ठंडे पानी की प्याऊ शुरू की गई।
क्यों जरूरी है यह अभियान?
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पुराने स्रोतों का पुनरुद्धार: कुएं, बावड़ी और नदियों की सफाई से प्राकृतिक जल स्रोत रिचार्ज होंगे।
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सामूहिक भागीदारी: जब तक ग्रामीण खुद फावड़ा और तगारी लेकर नहीं निकलेंगे, तब तक जल संकट खत्म नहीं होगा।
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भविष्य की तैयारी: 2026 के इस अभियान का मुख्य लक्ष्य सामूहिक प्रयासों से भू-जल स्तर को बढ़ाना है।
अपील: जन अभियान परिषद का संदेश साफ है— जल स्रोतों को साफ रखें, सोखता गड्ढे बनाएं और पानी की हर बूंद का हिसाब रखें, क्योंकि जल ही कल है।
